इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के गवर्निंग बोर्ड ने अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटर्स के लिए 'डेवलपमेंट पाथवे प्रोग्राम' को जारी रखने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, बोर्ड ने स्पेशल टास्क फोर्स का पुनर्गठन करते हुए उसे 2030 तक आईसीसी के क्वालिफिकेशन पाथवे में उनके शामिल होने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
आईसीसी बोर्ड ने एडिनबर्ग में आयोजित अपनी वार्षिक बैठक के दौरान इंडिपेंडेंट डायरेक्टर डॉ. रोज रिवाज और आईसीसी मुख्य कार्यकारी समिति की सदस्य सारा कीन को भी स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल करने को मंजूरी दी।
आईसीसी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि वे बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मौजूदा सदस्यों के साथ इस टास्क फोर्स का हिस्सा होंगी। यह टास्क फोर्स महिला क्रिकेट कार्यक्रम की निगरानी जारी रखते हुए खिलाड़ियों को अधिक अवसर, व्यापक प्रतिनिधित्व और प्रतिस्पर्धा के बेहतर मानकों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
डॉ. रॉस रिवाज ने कहा, "आईसीसी स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल होना और इस अहम पहल में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात है। टास्क फोर्स को एक साफ और टिकाऊ रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो स्ट्रक्चर्ड कोचिंग, सार्थक प्रतिस्पर्धी मौकों और सही हाई-परफॉर्मेंस पाथवे के जरिए अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटर्स के लगातार विकास में मदद करे। यह प्रोग्राम क्रिकेट के जरिए मौके पैदा करने के आईसीसी की प्रतिबद्धता को दिखाता है। मैं टास्क फोर्स के अपने साथियों और डिलीवरी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसे मकसद, ईमानदारी और लंबे समय तक चलने वाली स्थिरता के साथ पूरा किया जाए।"
आईसीसी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि वे बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मौजूदा सदस्यों के साथ इस टास्क फोर्स का हिस्सा होंगी। यह टास्क फोर्स महिला क्रिकेट कार्यक्रम की निगरानी जारी रखते हुए खिलाड़ियों को अधिक अवसर, व्यापक प्रतिनिधित्व और प्रतिस्पर्धा के बेहतर मानकों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
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इसके अलावा, इस प्रोग्राम के तहत खिलाड़ियों को एक ग्रुप के तौर पर ट्रेनिंग करने और मुकाबला करने के मौके मिलते रहेंगे, जैसा कि पिछले 12 महीनों में भारत और इंग्लैंड के दौरों के दौरान हुआ था। खेलने के ऐसे सामूहिक मौकों को भी धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा और ये मुकाबले ऐसी टीमों के विरुद्ध होंगे जिन्हें 2030 तक आईसीसी क्वालिफिकेशन इवेंट्स की ओर उनके विकास में मदद करने के लिए रणनीतिक नजरिए से चुना जाएगा।