दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के विदेशों में किए गए प्रदर्शन पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि विराट कोहली ने खुद को विदेशों में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज के रूप में स्थापित करने से ज्यादा उपलब्धि हासिल की है। इसका रास्ता सचिन तेंदुलकर ने दिखाया था।
डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "मुझे सचिन तेंदुलकर की याद आती है, जिन्होंने भारत के लिए यह ट्रेंड शुरू किया था। सचिन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दिखाया कि एक सबकॉन्टिनेंट बल्लेबाज के तौर पर, आप बाउंसी और सीमिंग कंडीशन में अच्छा कर सकते हैं। विराट ने इसे आगे बढ़ाया और स्तर बढ़ाया।"
डिविलियर्स ने कहा कि कोहली और तेंदुलकर ने अब केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे भारतीय बल्लेबाजों को घर से बाहर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है। दोनों विराट और सचिन के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। डिविलियर्स का मानना है कि राहुल के पास विदेशों में सफल होने की तकनीक के बावजूद अभी भी अपने खुद को बेहतर करने की गुंजाइश है।
सचिन ने 2013 में संन्यास लिया था। 200 टेस्ट मैचों में उनके नाम 15,921 रन हैं, जो टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड है। तेंदुलकर के टेस्ट रनों में से लगभग 55 प्रतिशत (8705 रन) घर से बाहर आए। वह विदेशी हालात में टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं। वहीं, विराट कोहली ने 123 टेस्ट में 9,230 रन बनाए हैं। इस दौरान कोहली ने भारत के बाहर 66 टेस्ट में 4,774 रन बनाए। विराट ने 2025 में टेस्ट को अलविदा कह दिया था।
डिविलियर्स ने कहा कि कोहली और तेंदुलकर ने अब केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे भारतीय बल्लेबाजों को घर से बाहर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है। दोनों विराट और सचिन के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। डिविलियर्स का मानना है कि राहुल के पास विदेशों में सफल होने की तकनीक के बावजूद अभी भी अपने खुद को बेहतर करने की गुंजाइश है।
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आंकड़ों के मुताबिक, सचिन विदेशों में ज्यादा सफल हैं। डिविलियर्स ने कोहली के असर की बात कही है, जिसके मुताबिक भारत के घर से बाहर एक मजबूत टेस्ट टीम के तौर पर उभरने में कोहली के अहम योगदान का जिक्र है।