इंग्लैंड के क्रिकेटर नॉर्मन गिफर्ड (Norman Gifford) का जनवरी 2026 में निधन हो गया। वह एक चकमा देने वाले, धीमे खब्बू गेंदबाज थे। अपने निकनेम, एप्पल नॉर्म (जो उन्हें गुलाबी गाल और अच्छे मिजाज के लिए मिला) से भी खूब पहचाने जाते थे। उन्हें एक खास क्रिकेटर मानने की और भी कुछ वजह हैं:

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* नॉर्मन गिफर्ड ने 2000 से ज़्यादा फर्स्ट-क्लास विकेट (2068) लिए और जिस तरह आजकल रेड-बॉल क्रिकेट वाले मैच की गिनती कम हो रही है, विकेट की ये गिनती बड़ी ख़ास है। आज के गेंदबाज तो ऐसा रिकॉर्ड बनाने के बारे में सोचते भी नहीं। 13.00 की औसत से 7048 रन भी बनाए और 33 टेस्ट विकेट 31.09 की औसत से लिए।

* वनडे क्रिकेट में सबसे पहला मैन ऑफ द मैच अवार्ड उन्हें ही मिला था (जबकि उनकी टीम मैच हार गई थी),1963 में सबसे पहले जिलेट कप (Gillette Cup) फाइनल में ससेक्स के विरुद्ध 4-33 की गेंदबाजी के लिए।

* 1964 इंग्लिश सीजन में 98 विकेट लिए जिससे वूस्टरशायर काउंटी चैंपियन बनी और इसी प्रदर्शन की बदौलत सिलेक्टर्स ने उन्हें लॉर्ड्स में एशेज टेस्ट के लिए इंग्लैंड टीम में खेलने बुला लिया। हालांकि शुरुआत खराब नहीं रही पर स्पिनर के तौर पर पहली पसंद में सीधे, सबसे पहले सीनियर टोनी लॉक (Tony Lock) और उसके बाद अपने से छोटे डेरेक अंडरवुड (Derek Underwood) के साथ टकराव था और नतीजा ये रहा कि अगला कॉल-अप सात साल के इंतजार के बाद ही आया।

* बहरहाल वूस्टरशायर के लिए अच्छा प्रदर्शन जारी रखा:
- 1965 में, चेस्टरफील्ड में डर्बीशायर के विरुद्ध 7-23 की गेंदबाजी जिसमें करियर की एकमात्र हैट्रिक शामिल थी।
- 1968 में शेफ़ील्ड में यॉर्कशायर के विरुद्ध 8-28 का अपने करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।
- 1971 में वूस्टरशायर के कप्तान बने और टीम को पहला संडे लीग टाइटल दिलाया। उसी साल उन्हें इंग्लैंड ने वापस टेस्ट टीम में बुलाया और हेडिंग्ले में पाकिस्तान के विरुद्ध अंडरवुड की जगह खेले। संयोग से, इंग्लैंड ने यह टेस्ट जीत लिया।

* जब इंग्लैंड ने 1972-73 में टोनी लुईस की टीम भारत टूर पर आई तो गिफर्ड को पहले ही बता दिया था कि खब्बू स्पिन गेंदबाज के तौर पर वे पहली पसंद नहीं होंगे। तब भी भारत और पाकिस्तान के विरुद्ध, उस टूर की, दो सीरीज में चार टेस्ट खेले।

*अपना आखिरी टेस्ट मैच (15वां) 1973 में लॉर्ड्स में न्यूजीलैंड के विरुद्ध खेले।

*1974 में वूस्टरशायर को एक और काउंटी टाइटल दिलाया, विजडन ने क्रिकेटर ऑफ द ईयर में से एक चुना। कुल मिलाकर तीन चैंपियनशिप जीतने वाली टीम के लिए खेले। वह 2017 में वूस्टरशायर के प्रेसिडेंट बने।

*1978 में उन्हें MBE अपॉइंट किया गया।

* लगभग 45 साल की उम्र में शारजाह में रॉथमंस फोर नेशंस कप (Rothmans Four Nations Cup) में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के विरुद्ध दो वनडे इंटरनेशनल मैच में इंग्लैंड के कप्तान थे। इसमें कोई शक नहीं कि ये एक कामचलाऊ इंतज़ाम था क्योंकि इंग्लैंड ने अपने कई टॉप खिलाड़ियों को आराम दिया (इनमें कप्तान डेविड गॉवर भी थे)। इंग्लैंड दोनों मैच हार गया। पाकिस्तान के विरुद्ध गिफर्ड ने 10 ओवर में 4-23 की गेंदबाजी की (इसमें इमरान खान को गोल्डन डक पर आउट किया)। वह किसी फुल मेंबर देश के लिए सबसे बड़ी उम्र में ओडीआई डेब्यू करने वाले खिलाड़ी हैं। वह रातों-रात असिस्टेंट मैनेजर से कप्तान बन गए थे। उन कुछ खिलाड़ियों में से एक, जो अपने 40वें जन्मदिन के बाद (44 साल और 361 दिन) की उम्र में ओडीआई में आए। दो मैच खेले, दोनों कप्तान के तौर पर।

* इसके बाद वरिकशायर के लिए खेलने लगे और 1985 में उनके कप्तान बने।

* फरवरी 86 में, नॉर्मन गिफर्ड इंग्लैंड B टीम के साथ थे असिस्टेंट मैनेजर की ड्यूटी में। तब, TCCB (तब इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड का यही नाम था) के मना करने के बावजूद, टीम की जरूरत में अपने 46वें जन्मदिन से 3 हफ्ते पहले श्रीलंका-इंग्लैंड B, तीसरे अनऑफिशियल टेस्ट में खेले।

*1986 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपना 2000वां विकेट लिया और शायद ये रिकॉर्ड बनाने वाले इंग्लैंड के आखिरी गेंदबाज हैं।

*आखिरकार 1988 में 48 साल की उम्र में रिटायर हो गए।

* बहुत कम फर्स्ट-क्लास क्रिकेटरों ने नॉर्मन गिफर्ड से ज्यादा मैच खेले हैं। कुल 710 मैच- मैच की गिनती की लिस्ट में 20वें नंबर पर है ये रिकॉर्ड।

*1989 में जब ससेक्स के कोच थे तब ऑफर मिला कि रिटायरमेंट का फैसला बदलें और केंट के विरुद्ध खेलें। असल में पिच पर नमी थी और उसी का फायदा उठाने के लिए ये ऑफर मिला था लेकिन वे नहीं माने।

*2016 में एक अनोखा सम्मान मिला। जिन दो काउंटी वूस्टरशायर और वरिकशायर के लिए वे खेले, हर साल इन दोनों के बीच वाइटैलिटी ब्लास्ट टी20 मैचों के विजेता को नॉर्मन गिफर्ड ट्रॉफी मिलने का सिलसिला शुरू हुआ।

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चरनपाल सिंह सोबती

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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