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Sunette Viljoen: इस साल जब डब्ल्यूपीएल (WPL) शुरू होगी तो ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर एलिस पेरी की कमी बड़ी महसूस होगी- सिर्फ़ उनके रन, विकेट या आकर्षक व्यक्तित्व के लिए नहीं, उनकी बहुमुखी टेलेंट के लिए भी। पेरी को 2024 के विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलना था। आज की क्रिकेट की सबसे बेहतरीन क्रिकेट ऑलराउंडरों में से एक और उनकी बहुमुखी टेलेंट की सबसे बड़ी झलक ये कि क्रिकेट के साथ-साथ फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप भी खेलीं और ऐसा करने वाली पहली ऑस्ट्रेलियाई हैं। 2011 में जर्मनी में फुटबॉल वर्ल्ड कप खेला था।

अगर बहुमुखी टेलेंट के नजरिए से देखें, तो डब्ल्यूपीएल में एक और ऐसी ही क्रिकेटर का जिक्र आते-आते रह गया। उस पर, उनकी स्टोरी तो डब्ल्यूपीएल के लिए लगभग अनजान सी रह गई। ये ओलंपिक मेडल विजेता डब्ल्यूपीएल में खेलने के लिए पूरी तरह तैयार थी लेकिन उनके टेलेंट को डब्ल्यूपीएल के पहले सीजन में ऑक्शन में शामिल पांचों टीम ने सही तरह पहचाना नहीं। कुल 87 खिलाड़ियों को चुना और कई नाम अनसोल्ड रह गए और इसी लिस्ट में एक नाम, इस ओलंपिक मेडल विजेता का भी था।

ये थीं दक्षिण अफ्रीका की सुनेटे विलोएन (Sunette Viljoen) जिनका बेस प्राइस 30 लाख रुपये था। सुनेटे ने 2000-2002 के दौरान 1 टेस्ट और 17 वनडे खेले। जो एक टेस्ट मार्च 2002 में पार्ल में खेला, वह भारत के विरुद्ध था और 17 एवं 71 के स्कोर बनाए (तब वह 18 साल की थीं)। वनडे में, 2000 में डेब्यू किया (16 साल की उम्र में इंग्लैंड के विरुद्ध और दक्षिण अफ्रीका की सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं) और कुल रिकॉर्ड रहा 198 रन और 5 विकेट। इसमें वर्ल्ड कप (न्यूजीलैंड में), 2000/01 में खेले गए 8 मैच शामिल हैं।

तो क्रिकेट खेलते-खेलते ओलंपिक का जिक्र कैसे आया? असल में उनके एथलेटिक्स में जाने की सबसे बड़ी वजह थी उनकी ये सोच कि महिला क्रिकेट में प्रोफेशनल करियर बनाने के कोई ख़ास मौके नहीं हैं और इसे तो सब शौकिया तौर पर ही खेल रहे हैं। 'मैं 18 साल की थी, अभी-अभी मैट्रिक पूरा किया था। तभी मुझे एथलेटिक्स स्कॉलरशिप ऑफर हुई जिसमें मेरी सारी पढ़ाई नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी ने स्पांसर की। इसलिए जब मैं पढ़ रही थी तो मेरे माता-पिता का कोई खर्च नहीं हुआ,' खुद सुनेटे ने बताया।

उनके एक हाई स्कूल एथलेटिक्स कोच ने ग्राउंड में जब ये देखा कि वह क्रिकेट बॉल को बेहद दूर तक फेंक रही हैं तो उन्हें जेवलिन थ्रो के लिए मना लिया। ये तो सुनेटे को भी मालूम था कि वह बचपन से अलग-अलग चीज़ों को बड़े असरदार तरीके से दूर तक फेंकने सकती थीं। यहां क्रिकेट बैक फुट पर आ गया और 2003 से जेवलिन थ्रो पर पूरा ध्यान लगा दिया। मेहनत बेकार नहीं गई और नाइजीरिया में ऑल अफ्रीका गेम्स में ब्रॉन्ज़ जीता और फ्रांस में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया।

2004 में एथेंस और 2008 में बीजिंग ओलंपिक के लिए दक्षिण अफ्रीकी टीम में थीं। इन दो गेम्स के बीच एक कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड जीता। बहरहाल जेवलिन थ्रो में ग्लोबल चर्चा का सबसे बेहतर दौर 2011 के बाद ही आया। वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीते: 2011 में डेगू में सिल्वर और 2015 में बीजिंग में ब्रॉन्ज़। इसके 5 साल बाद रियो डी जनेरियो ओलंपिक में सिल्वर जीता। दो कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल भी जीते और 5 बार अफ्रीकी चैंपियन रही।

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रियो में (जो उनके चौथे गेम्स थे) सिर्फ क्रोएशिया की सारा कोलाक से पीछे रही। सबसे अच्छा थ्रो 64.92 मीटर था (कोलाक 66.18 मीटर)। वास्तव में तो लंदन 2012 ओलंपिक में भी मेडल जीत लिया होता। तब 64.53 मीटर की सबसे बेहतर थ्रो के साथ चौथे नंबर पर रही। 96 साल बाद किसी क्रिकेटर ने ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता। इन सब सालों में दूसरे ब्रॉन्ज़ ही जीत पाए थे।

टोक्यो 2020 से पहले चोट लग गई जिससे सुनेटे की, अपने 5वें गेम्स में हिस्सा लेने की उम्मीद खत्म हो गई लेकिन कई टाइटल और मेडल के साथ ट्रैक को अलविदा कहा। आम तौर पर क्रिकेटर, क्रिकेट से रिटायर होने के बाद ओलंपिक में जाते हैं। सुनेटे की स्टोरी अलग है। उन्होंने क्रिकेट खेला, फिर जेवलिन थ्रो में कामयाबी मिली और जब ट्रैक को छोड़ा तो फिर से क्रिकेट में लौट आईं और डब्ल्यूपीएल में खेलने के लिए रजिस्टर भी किया। फर्क ये कि सुनेटे इस बार क्रिकेट में आईं तो एक ओलंपिक मेडल विजेता थीं और जेवलिन थ्रो में कई और मेडल भी जीते थे।

क्रिकेट में दूसरा राउंड घरेलू टी20 चैंपियनशिप में ईस्टर्न के लिए खेलने से शुरू हुआ और 38 साल की उम्र में टाइटन्स लेडीज़ के लिए साइन किया। इस बार वे खुद कह रही थीं कि सिर्फ एक्टिव रहने और मनोरंजन के तौर पर क्रिकेट खेल रही हैं। विश्वास कीजिए, तब भी सुनेटे का 40 साल की उम्र में, यानि कि क्रिकेट को पहली बार छोड़ने के 20 साल बाद भी लक्ष्य था अपने देश में 2023 में होने वाले आईसीसी महिला टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में खेलना।

इस तरह 2023 में जब डब्ल्यूपीएल शुरू हुआ, सुनेटे अकेली ऐसी वर्ल्ड एथलेटिक्स मेडलिस्ट थीं जिन्होंने क्रिकेट टेस्ट मैच भी खेला था और ऐसी ओलंपिक मेडलिस्ट थीं जिन्होंने क्रिकेट वर्ल्ड कप खेला था। टॉप ऑर्डर के लिए बिलकुल सही हार्ड-हिटिंग राइट-हैंड बल्लेबाज लेकिन डब्ल्यूपीएल ने उनकी उम्र देखी, न कि उनमें खेलने की एनर्जी। अब उम्र 42+ साल लेकिन अभी भी एक्टिव हैं। आखिरी मैच लायंस (LIONS WMN) बनाम डॉल्फिंस (Dolphins WMN) था डरबन में 14 दिसंबर 2025 को Women Pro20 टूर्नामेंट में। इसमें 4 बाउंड्री के साथ 41 रन (38 गेंद में) बनाए और अपनी टीम को 2 रन से जीत दिलाई।

चरनपाल सिंह सोबती

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Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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