Raj Angad Bawa: आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स के विरुद्ध अपने पहले मैच के लिए, मुंबई इंडियंस ने 'इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट्स' (Impact Subs) के तौर जो नाम दिए थे वे सूर्यकुमार यादव, कॉर्बिन बॉश, रॉबिन मिन्ज़, राज बावा और अश्विनी कुमार के थे। ये राज बावा कौन है?
राज अंगद बावा, चंडीगढ़ का एक युवा क्रिकेटर, जो 'सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर' है (खब्बू बल्लेबाज और दाएं हाथ से मीडियम-फास्ट गेंदबाजी)। भारत की 2022 आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप जीत के स्टार में से एक थे : युगांडा के विरुद्ध 162* रन (इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा स्कोर) जो अंडर 19 वर्ल्ड कप में किसी भी भारतीय का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी थे (और 2004 में शिखर धवन के 155 रन के रिकॉर्ड को तोड़ा)। इसके बाद, फाइनल में इंग्लैंड के विरुद्ध 5/31 का ऐतिहासिक और मैच जीतने वाला प्रदर्शन जो अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में किसी भी गेंदबाज का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था।
इसके बाद राज को अपना आईपीएल सफर शुरू करने में ज्यादा देर नहीं लगी और पंजाब किंग्स ने 2022 के ऑक्शन में कड़े मुकाबले के बाद 2 करोड़ रुपये में उसे अपनी टीम में शामिल कर लिया। ये बात अलग है कि पंजाब किंग्स के साथ न तो ज्यादा मौके मिले (2022 सीज़न के 2 मैच में सिर्फ 11 रन बनाए और उसे गेंदबाज के तौर तो पर इस्तेमाल ही नहीं किया) और उस पर ख़राब फिटनेस जिसका नतीजा ये रहा कि 2024 के ऑक्शन से पहले उसे टीम से रिलीज़ कर दिया।
2025 के 'मेगा ऑक्शन' से पहले, मुंबई इंडियंस ने राज को 30 लाख रुपये में खरीद लिया। यहां भी सिर्फ 3 मैच खेले (सिर्फ एक में बल्लेबाजी जिसमें 8* बनाए और गेंदबाज के तौर पर इस्तेमाल ही नहीं किया), तब भी टीम ने इस खब्बू बल्लेबाज पर अपना भरोसा बनाए रखा और आईपीएल 2026 के लिए रिटेन कर लिया। इस तरह उसे एक और मौका मिला है कुछ बेहतरीन टी20 क्रिकेटरों के साथ ड्रेसिंग रूम में समय बिताने और अपने खेल को और निखारने के लिए कुछ नया सीखने का।
राज अंगद बावा का एक परिचय और भी है जो उनके गौरवशाली पारिवारिक इतिहास से जुड़ा है। वह ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता त्रिलोचन सिंह बावा (Trilochan Singh Bawa) के पोते (grandson) हैं। आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप और फिर आईपीएल में खेलने के साथ, राज ने इस गौरवशाली विरासत में एक नया चेप्टर जोड़ दिया है। उनके दादाजी की ओलंपिक में हासिल उपलब्धि ने जहां प्रेरणा दी, वहीं खेलों में शानदार योगदान की पारिवारिक परंपरा को भी राज ने आगे बढ़ाया। त्रिलोचन सिंह बावा उस भारतीय हॉकी टीम में थे जिसने 1948 के लंदन ओलंपिक में गोल्ड जीता था।
यही नहीं, राज के पिता, सुखविंदर सिंह बावा, उन कुछ कोच में से एक थे जिन्होंने युवराज सिंह को कोचिंग दी। अक्सर उन्हें ही युवराज को पेसर के बजाय स्पिन गेंदबाजी की सलाह का श्रेय भी दिया जाता है। इस तरह, इस परिवार ने खेलों में बेहतर प्रदर्शन के जुनून को हमेशा बढ़ावा दिया। वैसे राज अपने ओलंपियन दादाजी के साथ ज्यादा रह नहीं पाए और जब 5 साल के थे तभी उनका निधन हो गया था। इसीलिए हर किसी को राज बावा से बहुत उम्मीदें हैं।
त्रिलोचन सिंह बावा: लंदन 1948 ओलंपिक हॉकी फ़ाइनल में, भारत ने इंग्लैंड को 4-0 से हराकर गोल्ड जीता तो एक गोल उन्होंने भी किया था (इस ओलंपिक में उनका दूसरा गोल)। 1948 का ये हॉकी गोल्ड भारतीय खेलों की गौरवशाली शुरुआत माना जाता है, क्योंकि आजादी के बाद भारत को मिला ये पहला गोल्ड था।
सुखविंदर बावा: वे एक जाने-माने क्रिकेट कोच थे, युवराज सिंह और वीआर सिंह जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ियों को कोच किया। अपनी जवानी में हॉकी और क्रिकेट दोनों खेलते थे लेकिन 20 साल की उम्र के आस-पास रीढ़ की हड्डी में ऐसी चोट लगी कि अपना पूरा ध्यान सिर्फ कोचिंग पर ही लगाना पड़ा।
राज बावा: आईसीसी अंडर 19 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2022 में भारत को रिकॉर्ड पांचवीं बार जीत दिलाने में ख़ास भूमिका निभाई। जन्म नाहन (हिमाचल प्रदेश) में लेकिन बड़े हुए चंडीगढ़ में। बचपन से ही अपनी दादी और पिता से, अपने दादाजी के बारे में बाते सुनते आए हैं और ये हमेशा के लिए उनके ज़हन में बसी हुई हैं।
राज बावा याद करते हुए कहते हैं, 'जब भी मैं उस गोल्ड मेडल को देखता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं बस अंदाजा ही लगा सकता हूं कि उस ज़माने में इसे जीतना कितनी बड़ी बात रही होगी।' ये मेडल हमेशा राज बावा को अपने परिवार की खेल विरासत को आगे बढ़ाने का जोश देता है।
राज ने शुरुआत सुखविंदर की कोचिंग एकेडमी से की। वहां युवराज सिंह भी ट्रेनिंग करते थे और जल्दी ही राज के आयडल बन गए। ऐसा माना जाता है कि युवराज को देखकर ही राज ने बाएं हाथ से बल्लेबाजी करना शुरू किया था। 2022 अंडर 19 वर्ल्ड कप, राज बावा के लिए एकदम कामयाबी लाया (6 मैच में 252 रन और 9 विकेट)। वह रणजी ट्रॉफी भी खेलते हैं।
राज बावा को अहसास है कि अभी लंबा सफर तय करना है। ढेरों ऐसे खिलाड़ी है जो अपनी अंडर 19 क्रिकेट की कामयाबी को और आगे नहीं ले जा पाए लेकिन राज की रगों में एक ओलंपिक चैंपियन का खून है और इसलिए हर कोई उनकी कामयाबी की तो उम्मीद कर ही रहा है।
वैसे आपको बता दें कि भारत के इंटरनेशनल क्रिकेटर रीतिंदर सिंह सोढ़ी (18 वनडे) राज के चचेरे भाई हैं। वे भी 2000 अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत की श्रीलंका पर जीत के हीरो और 'मैन ऑफ द मैच' रहे थे।
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चरनपाल सिंह सोबती