भारत की महान तैराकों में शुमार आरती साहा ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली सबसे युवा एथलीट हैं, जिन्होंने साल 1952 में यह कारनामा 11 साल 10 महीने और 305 दिन की उम्र में किया था। आरती ने महज 19 साल की उम्र में इंग्लिश चैनल को पार करते हुए रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करवाया था। वह इसे पार करने वालीं पहली एशियाई महिला भी हैं।
24 सितंबर 1940 को कलकत्ता में जन्मीं आरती ने महज 4 साल की उम्र से तैराकी शुरू कर दी थी। अगले ही साल उन्होंने पहली बार प्रतियोगिता भी जीत ली।
इस बीच आरती को सचिन नाग का मार्गदर्शन मिला, जो ओलंपियन के साथ एशियन गेम्स के चैंपियन भी थे। आरती ने फ्रीस्टाइल और ब्रेस्टस्ट्रोक इवेंट में पश्चिम बंगाल के लिए कई प्रतियोगिताएं जीतीं। साल 1951 में आरती ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में नेशनल रिकॉर्ड बनाया।
ओलंपिक 1952 के लिए भारतीय दल में आरती साहा को डॉली नजीर, नीलिमा घोष और मैरी डिसूजा के साथ शामिल किया गया। 26 जुलाई 1952 को महिलाओं की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक हीट के साथ आरती ने सबसे युवा भारतीय ओलंपियन का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हालांकि, 3:40.8 सेकेंड के साथ आरती छठे स्थान पर रहीं और सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं।
इस बीच आरती को सचिन नाग का मार्गदर्शन मिला, जो ओलंपियन के साथ एशियन गेम्स के चैंपियन भी थे। आरती ने फ्रीस्टाइल और ब्रेस्टस्ट्रोक इवेंट में पश्चिम बंगाल के लिए कई प्रतियोगिताएं जीतीं। साल 1951 में आरती ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में नेशनल रिकॉर्ड बनाया।
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कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और साहस से यह उपलब्धि हासिल की। उनकी सफलता ने भारतीय महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साल 1960 में आरती को 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। वह इस सम्मान को हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट थीं। 23 अगस्त 1994 को इस दिग्गज तैराक ने दुनिया को अलविदा कर दिया।