साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की डिजाइन की गई एक विवादित फुटबॉल मूर्ति को तोड़ दिया गया है। मूर्ति का टूटना राज्य की राजनीति और खेल जगत दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

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शनिवार सुबह जब लोग स्टेडियम पहुंचे तो प्रतिमा टूटी हुई मिली। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। कुछ लोगों ने इसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत बताया। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इससे स्टेडियम की पुरानी पहचान खत्म हो गई।

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प्रतिमा को लेकर शुरू से मतभेद रहे हैं। जनता का एक वर्ग इसे आधुनिक कला का नमूना मानता है, तो फुटबॉल प्रशंसकों के एक वर्ग का मानना है कि देश के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियमों में से एक के बाहर ऐसी प्रतिमा उपयुक्त नहीं लगती।

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर कहा कि जिस संरचना को हटाने की बात पहले कही गई थी, उसे अब तोड़ दिया गया है। पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने हाल ही में कहा था कि यह प्रतिमा स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की योजना पर काम कर रही है।

प्रतिमा को लेकर शुरू से मतभेद रहे हैं। जनता का एक वर्ग इसे आधुनिक कला का नमूना मानता है, तो फुटबॉल प्रशंसकों के एक वर्ग का मानना है कि देश के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियमों में से एक के बाहर ऐसी प्रतिमा उपयुक्त नहीं लगती।

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यह प्रतिमा साल 2017 में फीफा अंडर-17 विश्व कप से पहले लगाई गई थी। इसमें धड़ से कटे हुए दो पैर और उनके ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई दिखाई देती थी। साथ ही इस पर 'बिश्वा बांग्ला' का लोगो भी लगा हुआ था। प्रतिमा स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के पास स्थापित थी। मूर्ति को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी सरकार) का प्रतीक भी माना जाता रहा है।

Article Source: IANS
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