इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में 21 भाषाओं में एक साथ स्पोर्ट्स अल्फाबेट बुकलेट लॉन्च की गई। यह अपने आप में एक अनोखा पहला है जो बच्चों में खेल की जानकारी (स्पोर्ट्स लिटरेसी) को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

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खेल: जीने का एक जरिया (स्पोर्ट्स: ए वे ऑफ लाइफ) के तहत आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने की। लॉन्च सेरेमनी में मशहूर हॉकी प्लेयर, ओलंपियन और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित अशोक ध्यानचंद के साथ-साथ संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. मिलिंद पांडे और कई सांसद शामिल हुए।

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स्पोर्ट्स अल्फाबेट लांच का करने का विचार कॉन्सेप्ट ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष और एक खेल रिसर्चर कनिष्क पांडे ने विकसित किया है। इस प्रोजेक्ट को भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लक्ष्य और एक दशक से ज्यादा की रिसर्च और प्रयोग के बाद लांच किया गया है।

इस अवसर पर कनिष्क पांडे ने कहा, "जैसे अल्फाबेट बच्चों के लिए पढ़ाई का आधार होते हैं, वैसे ही स्पोर्ट्स अल्फाबेट खेल में दिलचस्पी पैदा करने की दिशा में पहला कदम हो सकते हैं। ये बुकलेट बच्चों को अक्षर और पढ़ना सीखने में मदद करके दोहरा फायदा देती हैं, साथ ही खेल से जुड़ाव भी बनाती हैं।"

उन्होंने कहा, "इस पहल का मकसद खेल के प्रति जागरुकता को बढ़ाना, खेल और शिक्षा को एक-दूसरे का पूरक बनाना, किंडरगार्टन स्तर पर अनुशासन, नेतृत्व और फैसले लेने जैसे खेल के मूल्य सिखाना, और आउटडोर शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देकर बच्चों की मोबाइल फोन, कंप्यूटर और ऑनलाइन गेमिंग पर निर्भरता कम करना है।"

पांडे ने आगे कहा कि भारत में खेल और शिक्षा को पारंपरिक रूप से अलग या मुकाबला करने वाले डोमेन के तौर पर देखा जाता रहा है, जबकि असल में वे एक-दूसरे के पूरक हैं।

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उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे बड़े वैश्विक संस्थानों के उदाहरण दिए, जो पढ़ाई और खेल दोनों में बहुत अच्छे हैं, और जिनके छात्र ओलंपिक स्तर पर अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पांडे ने कहा कि जहां भारत अलग खेल विश्वविद्यालय बना रहा है, वहीं मौजूदा उच्च शिक्षा संस्थानों को खेल का केंद्र बनाने की जरूरत है। इन बुकलेट्स का लक्ष्य किंडरगार्टन लेवल पर एजुकेशन और स्पोर्ट्स की मिली-जुली नर्सरी बनाना है।

स्पोर्ट्स अल्फाबेट बुकलेट्स कई भारतीय भाषाओं में बनाई गई हैं, जिनमें हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, संस्कृत, मराठी, बांग्ला, खासी, भोजपुरी, बुंदेली, राजस्थानी, कुमाऊंनी, गढ़वाली, कश्मीरी, पंजाबी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, ओडिया, मलयालम, और गुजराती शामिल हैं, साथ ही दो विदेशी भाषाएं—अरबी और नेपाली—भी शामिल हैं।

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नेपाल के सांसद अभिषेक प्रताप शाह नेपाली प्रारुप के लॉन्च के इवेंट में शामिल हुए और इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि वह नेपाल के प्राथमिक स्कूलों में इसे लागू करने की सलाह देंगे।

स्पोर्ट्स अल्फाबेट बुकलेट्स कई भारतीय भाषाओं में बनाई गई हैं, जिनमें हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, संस्कृत, मराठी, बांग्ला, खासी, भोजपुरी, बुंदेली, राजस्थानी, कुमाऊंनी, गढ़वाली, कश्मीरी, पंजाबी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, ओडिया, मलयालम, और गुजराती शामिल हैं, साथ ही दो विदेशी भाषाएं—अरबी और नेपाली—भी शामिल हैं।

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अशोक ध्यानचंद ने कहा कि वह लंबे समय से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं।

Article Source: IANS
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