कहते हैं कि किसी चीज की सही अहमियत उसी इंसान को पता होती है, जिसने वर्षों से उसके लिए इंतजार किया हो। पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। रोनाल्डो का बचपन गरीबी में गुजरा। एक समय ऐसा भी था, जब रोनाल्डो के घर में खाने तक के पैसे नहीं थे। मां दूसरों के घर में काम करती थी। हालांकि, रोनाल्डो हालातों के आगे झुके नहीं, बल्कि इनसे लड़ने का फैसला किया।
बचपन से ही रोनाल्डो ने घर चलाने में अपनी मां की हरसंभव मदद करने की कोशिश की। उनका दाखिला स्कूल में कराया गया, लेकिन एक बार शिक्षक से विवाद होने के बाद उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। रोनाल्डो की फुटबॉल में शुरुआत से ही खास रुचि थी। वह राह चलते किसी भी चीज को उठाकर प्रैक्टिस करने लगे। इस खेल के प्रति उनकी दीवानगी बढ़ती चली गई और 8 साल की उम्र में उन्होंने स्थानीय क्लब एंडोरिन्हा से खेलना शुरू कर दिया। इसके बाद रोनाल्डो पूरी तरह फुटबॉल में रम गए।
12 साल की उम्र में रोनाल्डो को घर से दूर जाना पड़ा और उनका दाखिला स्पोर्टिंग लिस्बन एकेडमी में कराया गया। इस अकादमी में उन्होंने शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया और अपने खेल को भी निखारा। 18 वर्ष की उम्र में रोनाल्डो की मैनचेस्टर यूनाइटेड में एंट्री हुई। क्लब ने इस युवा फुटबॉलर की काबिलियत को देखते हुए उन्हें 17 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदा, और बस यहीं से रोनाल्डो की जिंदगी बदल गई।