सिर से माता या पिता का साया उठने के बाद चंद घंटों में फिर से मैदान पर खेलने उतरने के लिए बड़ा कलेजा चाहिए होता है। जिंदगी के इस सबसे बड़े दुख से उबरने में लोगों को महीने, वर्षों लग जाते हैं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे हैं, जो इस मुश्किल समय में दिल पर पत्थर रखकर टीम के लिए मैदान पर न सिर्फ खेलने उतरे हैं, बल्कि जीत में भी अहम योगदान दिया है।
सचिन तेंदुलकर : भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर साल 1999 में वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे थे, जब उनके पिता का निधन हो गया था। 19 मई, 1999 को सचिन ने भारत की तरफ से जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला खेला था और इसी तारीख को उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया था। सचिन अपने पिता रमेश तेंदुलकर के अंतिम संस्कार के लिए स्वदेश लौटे थे। अंतिम संस्कार के तुरंत बाद सचिन इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए थे। 23 मई, 1999 को सचिन केन्या के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम का हिस्सा थे और उन्होंने 101 गेंदों में 140 रनों की शानदार पारी खेली थी।
विराट कोहली : साल 2006 में दिल का दौरा पड़ने से विराट कोहली के पिता का निधन हो गया था। कोहली इस समय रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की तरफ से कर्नाटक के खिलाफ मुकाबला खेल रहे थे। विराट की उम्र तब सिर्फ 18 साल थी, लेकिन वह दिल पर पत्थर रखकर अगले दिन दिल्ली की ओर से बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे थे। विराट ने 90 रनों की शानदार पारी भी खेली थी।