इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने स्टीफन फ्लेमिंग (Stephen Fleming) को टेस्ट टीम का नया हेड कोच और जो रूट (Joe Root) को कप्तान नियुक्त किया है। बोर्ड ने गुरुवार (30 जुलाई) को इसका ऐलान किया। रूट ने 2022 के बाद दोबारा फुलटाइम कप्तान के तौर पर इंग्लैंड टेस्ट टीम की कमान संभाली है।
इस महीने की शुरूआत में चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच पद से हटने के बाद फ्लेमिंग ने ईसीबी के साथ चार साल की डील की है, जो सितंबर 2030 को खत्म होगी।
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न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तान इंग्लैंड में खेले जाने वाले क्रिकेट से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं, वह मिडलसेक्स, यॉर्कशायर और नॉटिंघमशायर के लिए खेले हैं। 2005 में अपनी काउंटी टीम को चैंपियनशिप का खिताब भी जिताया था - और 'द हंड्रेड' में सदर्न ब्रेव के कोच भी रहे हैं।
बता दें कि फ्लेमिंग के हमवतन क्रिकेटर रहे ब्रेंडन मैकुलम को निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टेस्ट टीम के हेड कोच पद से हटा दिया गया था। हालांकि मैकुलम अभी भी लिमिटेड ओवर टीम के कोच हैं, वहीं कप्तान बेन स्टोक्स ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।
हालांकि, 53 साल के फ्लेमिंग पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में यह रोल नहीं निभाएंगे। उनकी जगह मार्कस ट्रेस्कोथिक अंतरिम कोच के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे। चेन्नई सुपर किंग्स के साथ 18 साल का साथ खत्म होने के बाद परिवार के साथ कुछ समय बिताकर, फ्लेमिंग इस गर्मी के आखिर में इंग्लैंड पहुंचेंगे ताकि दिसंबर में शुरू होने वाले साउथ अफ्रीका टेस्ट दौरे की तैयारी शुरू कर सकें।
कप्तानी के लिए ईसीबी रूट के अनुभव के साथ गई है। इंग्लैंड के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाज रूट ने 2017 से 2022 तक 64 टेस्ट में इंग्लैंड की कमान संभाली थी।
ईसीबी के एक बयान में फ्लेमिंग ने कहा, "इंग्लैंड के टेस्ट कोच के तौर पर जुड़ने को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। यह दुनिया भर के क्रिकेट में कोचिंग के सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक है और इस पद पर चुने जाने पर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं।
"मैं खिलाड़ियों के साथ काम करने और ब्रेंडन मैकुलम और बेन स्टोक्स द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं। बेशक, मकसद हमेशा जीतना ही होता है। लेकिन साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना है कि टीम मध्यम और लंबी अवधि के भविष्य के लिए अच्छी स्थिति में हो। टीम में और उसके आसपास बहुत सारे युवा टैलेंट हैं और हमारा लक्ष्य उन्हें विश्व-स्तरीय क्रिकेटर के तौर पर अपनी क्षमता को पूरा करने में मदद करना है।"