भारत के तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने बताया है कि लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ रहने के दौरान हेड कोच गौतम गंभीर से मिली सलाह उन्हें उनके इंटरनेशनल सफर की शुरुआत में भी गाइड कर रही है। यश ने उस बावुक पल को भी याद किया, जब उन्हें जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का पहली बार बुलावा आया।
ठाकुर ने एज-ग्रुप क्रिकेट, घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और इंडिया ए में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद पहली बार भारतीय टीम में जगह बनाई है। उन्होंने बताया कि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने उन्हें सलाह दी थी कि वे अपनी उन खूबियों पर ही टिके रहें जिनसे उन्हें सफलता मिली है, न कि ऊंचे स्तर पर खुद को पूरी तरह बदलने की कोशिश करें।
ठाकुर ने 'जियोस्टार' से कहा, "जब मैं लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ था और गौतम गंभीर से मिला, तो पहले दिन से ही उनके साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई। उन्होंने तब मेरे से कहा था कि तुमने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है। तुम्हें पता है कि विकेट कैसे लेने हैं और मैच कैसे जीतने हैं, इसलिए कभी भी अपनी सोच मत बदलना। क्रिकेट का स्तर बदलता रहेगा, घरेलू से आईपीएल और फिर इंटरनेशनल, लेकिन खुद को या अपनी मुख्य खूबियों को मत बदलना। उसी चीज पर टिके रहो जिसने तुम्हें यहां तक पहुंचाया है। अपनी स्किल्स और अपने प्रोसेस पर भरोसा रखो।'"
दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने कहा कि जब भी उन पर दबाव आया, तो ये शब्द हमेशा उनके लिए आत्मविश्वास का जरिया बने रहे। उन्होंने आगे कहा, "मैं आज भी उस सलाह को मानता हूं। जब भी मुझे दबाव महसूस होता है, तो मैं उनकी कही बातें याद करता हूं। इससे मुझे जमीन से जुड़े रहने और अपने खेल पर फोकस करने में मदद मिली है।" यश ठाकुर ने यह भी बताया कि कैसे उन्हें नागपुर पहुंचने पर अचानक पता चला कि उन्हें भारत के जिम्बाब्वे दौरे के लिए चुना गया है, जबकि वे अपने साथी क्रिकेटर हर्ष दुबे के साथ वहां पहुंचे थे।
ठाकुर ने याद करते हुए कहा, "मैं और हर्ष दुबे अभी नागपुर पहुंचे ही थे। जब मैं अपना सामान लेकर बाहर निकल रहा था, तो मेरे फोन पर लगातार मैसेज आने लगे और दोस्तों के फोन भी आए। उन्होंने मुझे बताया, 'तुम्हारा सिलेक्शन हो गया है' और मुझे बधाई दी। उस समय मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था, इसलिए मैंने ऑनलाइन चेक किया और पता चला कि मुझे जिम्बाब्वे दौरे के लिए चुना गया है। यह एक अविश्वसनीय एहसास था।"
दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने कहा कि जब भी उन पर दबाव आया, तो ये शब्द हमेशा उनके लिए आत्मविश्वास का जरिया बने रहे। उन्होंने आगे कहा, "मैं आज भी उस सलाह को मानता हूं। जब भी मुझे दबाव महसूस होता है, तो मैं उनकी कही बातें याद करता हूं। इससे मुझे जमीन से जुड़े रहने और अपने खेल पर फोकस करने में मदद मिली है।" यश ठाकुर ने यह भी बताया कि कैसे उन्हें नागपुर पहुंचने पर अचानक पता चला कि उन्हें भारत के जिम्बाब्वे दौरे के लिए चुना गया है, जबकि वे अपने साथी क्रिकेटर हर्ष दुबे के साथ वहां पहुंचे थे।
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उन्होंने कहा, "मैंने अंडर-19 क्रिकेट से लेकर रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, आईपीएल, इंडिया ए और अब भारतीय टीम तक का सफर धीरे-धीरे तय किया है। हर स्तर पर अपनी चुनौतियां थीं और मैंने हर मुश्किल को पार करने के लिए कड़ी मेहनत की। हर कदम आगे बढ़ने पर मुझे बहुत खुशी होती है। मैं अभी उस भावना को पूरी तरह से बयां नहीं कर सकता, क्योंकि जब कोई क्रिकेट खेलना शुरू करता है तो देश के लिए खेलना उसका सपना होता है। आखिरकार यहां पहुंचकर और भारत की जर्सी पहनकर ऐसा लगता है कि मेरी सारी मेहनत सफल हो गई है।"