श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) में एक बार फिर नेतृत्व बदलने की तैयारी चल रही है। एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से अध्यक्ष रहे शम्मी सिल्वा के बुधवार को अपने पद से हटने की उम्मीद है, जिसके बाद खेल के मामलों का जिम्मा संभालने के लिए एक अंतरिम प्रशासन का रास्ता साफ हो जाएगा।
'टेलीकॉमएशिया' की रिपोर्ट के अनुसार, शम्मी सिल्वा को क्रिकेट की सत्ता के गलियारों में एक कद्दावर हस्ती के रूप में पहचाना जाता है। सिल्वा साल 2017 से ही श्रीलंका क्रिकेट का हिस्सा रहे हैं। शीर्ष पद पर उनका 7 साल का कार्यकाल भी शामिल रहा है, लेकिन कुछ विवादों का सामना करने के बाद यह अनुभवी प्रशासक अब अपनी पारी समाप्त करने के लिए तैयार दिख रहा है।
नालंदा कॉलेज के पूर्व एथलीट रहे शम्मी ने कोलंबो क्रिकेट क्लब का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह वर्तमान में अध्यक्ष भी हैं। इसके बाद सिल्वा प्रशासनिक सीढ़ियां चढ़ते हुए देश में क्रिकेट की सबसे शक्तिशाली कुर्सी तक पहुंचे और कई बार निर्विरोध चुने गए। हालांकि, हाल के वर्षों में हालात बदल गए और रिपोर्ट के अनुसार उनका पद पर बने रहना लगातार मुश्किल होता गया।
शम्मी सिल्वा पर दबाव आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 में श्रीलंका के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बढ़ने लगा, जब आलोचकों ने खुलकर सवाल उठाने शुरू किए। मामला तब और बढ़ गया जब तत्कालीन खेल मंत्री रोशन रणसिंघे ने शम्मी सिल्वा को पद से हटाकर एक अंतरिम समिति नियुक्त कर दी। हालांकि, यह कदम उल्टा पड़ गया और स्थिति और ज्यादा विवादित हो गई।
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण श्रीलंका को तुरंत निलंबित कर दिया। यह एक ऐसा झटका था, जिसे सरकार झेल नहीं पाई। रिपोर्ट के अनुसार, इसके चलते शम्मी सिल्वा को जल्दबाजी में उनके पद पर वापस बहाल करना पड़ा।
असंतोष की ताजा लहर श्रीलंका के हालिया टी20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाने के बाद सामने आई। इस अभियान ने फैंस और हितधारकों दोनों को खेल की दिशा पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
सूत्रों ने टेलीकॉमएशियाडॉटनेट को बताया कि मौजूदा सरकारी अधिकारियों ने हाल ही में शम्मी सिल्वा से मुलाकात करते हुए उन्हें जमीनी हालात से अवगत कराया है। इन चर्चाओं में माना जा रहा है कि उन्होंने पद छोड़ने पर सहमति जता दी है।
बताया जा रहा है कि मंगलवार की कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद वह अगली सुबह अपने कार्यकाल को समाप्त करने की घोषणा कर सकते हैं।
संभव है कि उनकी समिति भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए इस्तीफा दे। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पूरी तरह से बदलाव होने की संभावना है, और जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक स्थिति को संभालने के लिए एक अंतरिम संस्था नियुक्त की जा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व क्रिकेटर से विपक्षी राजनेता बने एरन विक्रमरत्ने और राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के पूर्व प्रमुख सुरेश सुब्रमण्यम शीर्ष पद संभालने की दौड़ में सबसे आगे हैं। सिदाथ वेट्टिमुनी, कुशिल गुणशेखर और रोशन महानामा सहित कई सम्मानित पूर्व खिलाड़ियों के भी इस नई व्यवस्था का हिस्सा बनने की उम्मीद है।
संभव है कि उनकी समिति भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए इस्तीफा दे। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पूरी तरह से बदलाव होने की संभावना है, और जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक स्थिति को संभालने के लिए एक अंतरिम संस्था नियुक्त की जा सकती है।
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समाचार रिपोर्ट के अनुसार, सुधारों की मुहिम तब तेज हुई जब कई प्रमुख हस्तियों ने व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। इनमें स्पिन दिग्गज मुथैया मुरलीधरन भी शामिल थे। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की रिपोर्ट को श्रीलंका क्रिकेट को संकट से निकालकर स्थिरता और बेहतर प्रशासन की ओर ले जाने वाले रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।