भले ही पाकिस्तान का इंग्लैंड टूर उनके लिए निराशा और टेस्ट सीरीज में 3-0 की हार के साथ खत्म हुआ लेकिन उन्हें एक ऐसा खिलाड़ी मिल गया जो किसी जीत से कहीं ज्यादा कीमती साबित हो सकता है। उनका नाम है रजाउल्लाह।
एजबेस्टन टेस्ट से कुछ दिन पहले तक, मरदान के इस 21 साल के तेज गेंदबाज को पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट में भी सब अच्छी तरह नहीं जानते थे। तब भी, एक ही जबरदस्त टेस्ट में, उसने बैट और गेंद दोनों से रिकॉर्ड बना दिए। इंग्लैंड की पहली पारी में 148 रन देकर 4 विकेट लिए; जिसमें पहला टेस्ट विकेट जो रूट का था, और उन्हें अपने इंटरनेशनल करियर की सिर्फ चौथी गेंद पर आउट किया।
इसके बाद बल्लेबाजी में और भी कमाल किया। पाकिस्तान टेस्ट में पारी से हार के कगार पर था और ऐसे में रजाउल्लाह नंबर 9 पर बैटिंग करने आए और सिर्फ 63 गेंद पर 81 रन ठोक दिए, जिसमें 9 छक्के थे। सिर्फ 43 गेंदों में 50 पूरे किए, जो किसी पाकिस्तानी डेब्यू करने वाले खिलाड़ी के सबसे तेज फिफ्टी हैं। 9 छक्के लगा कर टेस्ट डेब्यू पारी में सबसे ज्यादा 6 के टिम साउथी के रिकॉर्ड की बराबरी की और नंबर 9 बल्लेबाज के तौर पर पाकिस्तान का रिकॉर्ड बनाया।
इस आक्रामक बल्लेबाजी की एक और खास बात ये थी कि 9 में से 8 छक्के इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की गेंद पर लगाए, जिसमें गस एटकिंसन के एक ओवर में लगाए तीन छक्के शामिल थे। जोफ्रा आर्चर, एटकिंसन और जोश टोंग जैसे गेंदबाजों का सामना बिना किसी डर के, जिस अंदाज में किया, वह गजब था।
जब रजाउल्लाह क्रीज पर आए, तो पाकिस्तान का स्कोर 312-7 था और इंग्लैंड को दोबारा बल्लेबाजी कराने के लिए जरूरी स्कोर से अभी भी 8 रन पीछे थे। ऐसे में वे सिर्फ टिके नहीं, आक्रामक बैटिंग की। मोहम्मद अब्बास के साथ 9वें विकेट के लिए 121 रन जोड़े जिससे पाकिस्तान कुल 449 का स्कोर बना सका और ये इस सीरीज में उनका सबसे बड़ा स्कोर था। तभी इंग्लैंड को जीत के लिए 130 रन का लक्ष्य दे पाए।
उनके 9 छक्के किसी पाकिस्तानी बल्लेबाज के एक टेस्ट पारी में सबसे ज्यादा 6 हैं (2002 में न्यूजीलैंड के विरुद्ध इंजमाम-उल-हक ने भी 9 छक्के लगाए थे), साथ ही पाकिस्तान के नंबर 9 बल्लेबाज के स्कोर का भी रिकॉर्ड बनाया। 2000 के बाद से टेस्ट डेब्यू पर 50 लगाने और 4 विकेट लेने वाले सिर्फ चौथे खिलाड़ी भी बन गए; इससे पहले साउथी, वानिंदु हसरंगा और कॉर्बिन बॉश के नाम ये रिकॉर्ड था।
बहरहाल संकेत ये थे कि रजाउल्लाह एक आम तेज गेंदबाज नहीं, उससे कहीं ज्यादा हैं पर उन्हें हर चर्चा में गेंदबाज ही गिनते थे। 2025-26 सीजन में ही तो अपना फर्स्ट -क्लास डेब्यू किया था और पाकिस्तान के टेस्ट कॉल से पहले सिर्फ 8 मैच खेले थे। इन मैचों में 20.86 की औसत से 30 विकेट लिए, जिसमें तीन बार 5 विकेट लेना शामिल था।
बहरहाल वे दिखा चुके थे कि बैटिंग में भी कोई अनाड़ी नहीं हैं। सिर्फ 95 गेंद में फर्स्ट-क्लास 100 लगाया था जिसमें 10 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उस मैच में, असल में पहली पारी में नंबर 9 पर 57* बनाए थे और जब पेशावर को फॉलो-ऑन करना पड़ा तो उन्हें ओपनिंग के लिए भेज दिया। इसका जवाब दिया एक 100 बनाकर। इसलिए एजबेस्टन में उनकी जबरदस्त हिटिंग कोई इत्तेफाक नहीं थी।
टेस्ट क्रिकेट तक के सफर की बात करें तो इसकी शुरुआत इस साल रावलपिंडी के लिए पाकिस्तान सुपर लीग में डेब्यू के साथ हुई। उनकी तेज रफ्तार गेंदबाजी को चर्चा मिली, भले ही दो मैच खेले और तीन विकेट लिए। इसके बाद उन्हें नेशनल टीम के लिए तेज गेंदबाज के कैंप के लिए कॉल आ गया।
तब भी, शायद उन्हें सपोर्ट करने वालों ने भी ये न सोचा होगा कि उनका करियर इस तेजी से आगे बढ़ेगा। टेस्ट टीम में सेलेक्शन तो इतना अचानक हुआ कि बुलावा आया तो उनके पास पासपोर्ट तक नहीं था। बोर्ड ऑफिशियल उन्हें ढूंढ रहे थे क्योंकि उनका फोन बंद था। आखिरकार एक कोच को उन्हें ढूंढने की ड्यूटी पर लगा दिया। इस तरह सिर्फ 8 फर्स्ट-क्लास मैच खेलने वाले खिलाड़ी को जब ढूंढा तो उसके बाद इंग्लैंड में पाकिस्तान की टेस्ट टीम में शामिल होने के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू हुई।
वैसे जानकार ये मान रहे हैं कि रन और विकेट से ज्यादा, पाकिस्तान के लिए सबसे खास उपलब्धि उनकी गेंद की रफ्तार है। जो पहला टेस्ट ओवर फेंका उस में हर गेंद लगभग 89 मील प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी थी। बाद में 91 और 92 मील प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंदबाजी भी की। इस सीरीज में पाकिस्तान के और किसी भी गेंदबाज ने तेज गेंदबाजी का ऐसा नजारा नहीं दिखाया था।
21 साल की उम्र और ये कहना गलत नहीं कि अभी वे टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं ; रेड-बॉल और इंटरनेशनल क्रिकेट का बड़ा कम अनुभव है और अभी बहुत कुछ सीखना है। तब भी पाकिस्तान को वह मिल गया है जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी: एक ऐसा युवा तेज गेंदबाज जो अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को सचमुच डरा सके।
इस सबके पीछे की व्यक्तिगत स्टोरी भी कम दिलचस्प नहीं है। रजाउल्लाह खैबर पख्तूनख्वा के मरदान से हैं। उनके बड़े भाई समीउल्लाह ने उन्हें घर के और दूसरे पुरुषों की तरह सीधे हाथ के काम पर न लगा, उनका शौक देख, क्रिकेट खेलने के लिए हर मदद देने में बड़ी ख़ास भूमिका निभाई। पेशावर और साहिर एसोसिएट्स के साथ घरेलू क्रिकेट के बाद फर्स्ट-क्लास, लिस्ट ए और टी20 मैच का सफर पार होता गया। कुछ ही महीने में वह एजबेस्टन में जो रूट को गेंदबाजी कर रहे थे। रुट को सिर्फ गेंदबाजी नहीं की, उन्हें आउट भी किया।
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पाकिस्तान सीरीज में तीनों टेस्ट मैच हार गया। तब भी इस निराशा के बीच उन्हें एक ऐसा खिलाड़ी मिला जिसे इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी ने भी नोटिस नहीं किया था। रजाउल्लाह का टेस्ट करियर इससे ज्यादा रोमांचक तरीके से शुरू नहीं हो सकता था। आश्चर्यजनक और हिट टेस्ट कॉल की मिसाल में ये कॉल भी जुड़ गया।