अफगानिस्तान के विरुद्ध न्यू चंडीगढ़ में टेस्ट के साथ, भारत के पूर्व खिलाड़ी साईराज बहुतुले ने टीम इंडिया के लिए अपनी नई पारी शुरू की पर इस बार वे खिलाड़ी नहीं, भारत के नए स्पिन-बॉलिंग कोच थे। भारत में बड़े नाम वाले और मशहूर स्पिनर की कभी कमी नहीं रही, पर उन सभी की तुलना में, लेग-स्पिनर साईराज बहुतुले न तो उतने मशहूर थे और न ही उतने जाने-माने। सच तो यह है कि उनका नाम शायद मौजूदा पीढ़ी ने सुना भी न हो क्योंकि हाल के सालों में उनकी न तो किसी विवाद के लिए चर्चा हुई और न ही वे किसी मसालेदार स्टोरी के लिए खबरों में रहे।
वह लगातार क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और न सिर्फ आईपीएल टीमों (इस सीजन में पंजाब किंग्स) को कोचिंग दी, भारत की अंडर-19, इंडिया A और घरेलू टीमों के लिए भी काम कर चुके हैं।
बहुतुले खुद दो टेस्ट और आठ वनडे इंटरनेशनल खेले तथा 5 इंटरनेशनल विकेट लिए। साफ़ है, इंटरनेशनल क्रिकेट में कोई ख़ास कामयाब नहीं रहे और इसलिए उन्हें ज़्यादा मौके भी नहीं मिले। तब भी, लगभग दो दशक के फर्स्ट-क्लास करियर में, 630 विकेट लिए, 6,000 से ज़्यादा रन बनाए और लिस्ट A क्रिकेट में 197 विकेट लिए। 6 रणजी ट्रॉफी फाइनल खेले (सभी मुंबई के लिए) और सभी 6 जीते। इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा 2003-04 के फाइनल की हुई, जिसमें निचले क्रम में 92 रन बनाए।
इस समय लगभग 53 साल के हैं बहुतुले और उनका कोच के तौर पर रिज्यूमे काफी बेहतर है। क्रिकेट से रिटायर होने के बाद विदर्भ, केरल, गुजरात और बंगाल के हेड कोच रहे, आईपीएल में, राजस्थान रॉयल्स और फिर पंजाब किंग्स के स्पिन-बॉलिंग कोच थे। बीसीसीआई से भी जुड़े थे और 2021 से 2024 तक बेंगलुरु में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में कोचिंग दी। 2022 में आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के बॉलिंग कोच थे और इस इवेंट के 2024 एडिशन के लिए भी सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा थे। कई और असाइनमेंट पर स्पेशलिस्ट बॉलिंग कोच के तौर पर काम किया है। देश में, इतने एक्टिव रिज़्यूमे वाले ज़्यादा कोच नहीं हैं।
खैर, अब उन्हें अपना सबसे बड़ा प्रमोशन मिला है और टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में शामिल होने से बड़ी ज़िम्मेदारी और क्या हो सकती है? टीम इंडिया के साथ यह नया रोल उनके लिए इंटरनेशनल असाइनमेंट के दरवाज़े खोलेगा।
असल में जब उन्हें लगा कि इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका तो रहा नहीं तो वे क्रिकेट से जुड़े रहने के लिए कोच बनना चाहते थे। इसीलिए क्रिकेट खेल रहे थे और तब भी जब विदर्भ टीम को कोच करने का ऑफर मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और रिटायर हो गए। वह रणजी ट्रॉफी में 400 विकेट लेने वाले सिर्फ़ 9वें गेंदबाज थे।
इन सबके बावजूद, बहुतुले को आज तक इस बात की निराशा है कि वह कभी आईपीएल नहीं खेले। 2010 तक लिस्ट A क्रिकेट, 2011 तक टी20 क्रिकेट और 2013 तक फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेले लेकिन फ्रेंचाइजी उनके स्किल से ज्यादा उनकी उम्र के चक्कर में पड़े रहे और किसी ने भी मौका न दिया। सच तो ये हैं कि आईपीएल के पहले दो सीज़न के दौरान तो वे भारत के सबसे कामयाब स्पिनरों में से एक थे।
बहुतुले के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है जिस पर उनके नाम के जिक्र में कोई ध्यान नहीं देता। उनके नाम अपने वनडे इंटरनेशनल करियर में सबसे ज्यादा मैच में न खेलने का भारतीय इंडिया रिकॉर्ड है। असल में दिसंबर 1997 से जनवरी 1998 के बीच 7 वनडे इंटरनेशनल खेले लेकिन नवंबर 2003 में एक और मैच खेलने के लिए टीम इंडिया में वापस आ गए। इस दौरान, टीम इंडिया लगातार ऐसे 196 वनडे इंटरनेशनल खेल चुकी थी जिनमें वे टीम का हिस्सा नहीं थे। वापसी के बाद कुछ ख़ास न कर पाए और एक मैच के बाद ही टीम से बाहर हो गए।
भारतीय क्रिकेट में, किसी क्रिकेटर के दर्दनाक कार एक्सीडेंट से वापसी की सबसे चर्चित स्टोरी ऋषभ पंत की है पर जो साईराज बहुतुले के साथ हुआ, वह भी कोई कम न था। उस एक्सीडेंट की कहानी भी कम दुखद नहीं है। जुलाई 1990 में, मशहूर गजल सिंगर जगजीत और चित्रा सिंह के बेटे विवेक सिंह की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। इस दुर्घटना की खबर सुर्खियों में रही। इस बात पर किसी ने ज्यादा ध्यान न दिया कि विवेक के दोस्त साईराज बहुतुले भी उस कार में थे पर किस्मत से बच गए। उनकी फीमर की हड्डी टूट गई और दाहिने पैर में बड़ा फ्रैक्चर हो गया था। पैर में स्टील की रॉड डालनी पड़ी थी। वह कोमा में भी चले गए थे, और ये सब बड़ा मुश्किल दौर था।
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बहरहाल इलाज और परिवार के सपोर्ट, खासकर पिता (जो खुद एक रणजी क्रिकेटर थे) के सपोर्ट से वे वॉयस लौटे। उनके पिता वसंत, महाराष्ट्र के लिए खेलते थे और उन्हें फिर से क्रिकेट खेलने के लिए मोटिवेट करते रहे। एक्सीडेंट के एक साल बाद स्टील रॉड निकाल दी और उसके बाद जल्दी ही वे सीनियर मुंबई टीम के लिए खेलने लगे और न्यूजीलैंड के विरुद्ध इंडिया अंडर-19 टीम में भी चयन हो गया।