देश के शीर्ष पहलवानों के भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) और उसके अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध करने के एक सप्ताह बाद प्रोफेशनल भारतीय मुक्केबाज नीरज गोयत ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के खिलाफ सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

हरियाणा के मुक्केबाज ने कहा कि बीएफआई की स्थिति डब्ल्यूएफआई से बेहतर नहीं है।

नीरज गोयत ने कहा, मुझे अपने पहलवानों पर गर्व है। वे कम से कम सामने तो आये और वो बात कही जो उन्हें गलत लगी। हमारा मुक्केबाजी संघ भी अलग नहीं है। बीएफआई के अधिकारी उन एथलीटों के साथ फोटो खिंचवाना चाहते हैं जो जीतते हैं। वे उनकी परवाह नहीं करते जो हारते हैं या वे क्यों हारे।

2012 में प्रोफेशनल मुक्केबाजी अपनाने वाले 31 वर्षीय नीरज ने कहा, अमित पंघल का ओलम्पिक में पदक जीतना तय था लेकिन दुर्भाग्य से वह प्रीक्वार्टरफाइनल में हार गए। इस हार के बाद वह मानसिक और शारीरिक रूप से टूट गए थे लेकिन फेडरेशन ने उनसे बात करने की जरूरत नहीं समझी।

बीएफआई के खराब हालात के बारे में बात करते हुए मुक्केबाज ने कहा कि फेडरेशन की एकमात्र चिंता प्रचार पाना है।

नीरज ने कहा, यहां तक कि विकास कृष्णन को भी टोक्यो ओलम्पिक के बाद मदद की जरूरत थी। विकास कृष्णन चोटिल थे लेकिन फेडरेशन को उस अस्पताल का नाम पता नहीं था जहां उनका इलाज चल रहा था। यदि वह पदक जीतते तो बीएफआई के अध्यक्ष हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने वाले और तस्वीर खिंचवाने वाले पहले व्यक्ति होते।

उन्होंने कहा, फेडरेशन की एकमात्र चिंता प्रचार पाना है। यह भारत में सभी खेल महासंघों के साथ स्थिति है। सरकार इन्हे भंग करे और नयी शुरूआत करे। एक नया नियम लागू किया जाए कि एक शीर्ष अधिकारी बनने के लिए व्यक्ति के पास खेल उपलब्धियां होनी चाहिए। इसे अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।

नीरज ने साथ ही कहा, उन्होंने एक विदेशी कोच रख लिया जो भारतीय मुक्केबाजी शैली के बारे में नहीं जानता । जिसे यह नहीं पता कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ कर दिखाने के लिए हमारे मुक्केबाजों को क्या चाहिए।

उन्होंने कहा, यदि हमें पेरिस 2024 तक चीजों को सुधारना है तो काम अभी से शुरू करना होगा।

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