भारत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी में लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। देश एक ओर 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जबकि 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। इस बीच, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी से भारत की वैश्विक पहचान मजबूत होती है और खिलाड़ियों को अपने ही देश में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलता है।
खेल मंत्रालय की रिलीज के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच भारत ने 15 से अधिक शहरों में 36 अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन किया है। इन आयोजनों ने यह साबित किया है कि भारत के पास विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि बड़े टूर्नामेंटों के सफल संचालन की क्षमता भी तेजी से विकसित हो रही है।
नई दिल्ली, अहमदाबाद, भुवनेश्वर, चेन्नई, गोवा, गुवाहाटी, राजगीर, पटना, हैदराबाद, पुणे, लखनऊ और महाबलीपुरम जैसे शहर अब अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। इन शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप, विश्व कप, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग टूर्नामेंट और महाद्वीपीय क्वालीफायर जैसे बड़े आयोजन शामिल हैं।
इन प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स, हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, मुक्केबाजी, टेबल टेनिस, फुटबॉल, तैराकी, पैरा स्पोर्ट्स, शतरंज, साइकिलिंग, फेंसिंग, वॉलीबॉल, रग्बी और सर्फिंग सहित कई खेल शामिल रहे। इनमें से कई प्रतियोगिताओं की मेजबानी भारत ने पहली बार की। इसके साथ ही भारतीय खिलाड़ियों ने घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कई यादगार उपलब्धियां भी हासिल कीं।
मनसुख मंडाविया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी अब भारत के खेल विकास का अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन देश की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ खिलाड़ियों को मजबूत विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने का अवसर देते हैं। इससे खिलाड़ियों को विदेश जाकर प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर होने वाला खर्च भी कम होता है। साथ ही अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों को बड़े आयोजनों का अनुभव मिलता है, जिससे भविष्य के लिए मजबूत खेल व्यवस्था तैयार होती है। उन्होंने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की तैयारी के लिए देशभर के अलग-अलग शहरों में प्रतियोगिताओं की मेजबानी से मिला अनुभव काफी उपयोगी साबित होगा और इससे भारत की आयोजन क्षमता और मजबूत होगी।
भारत की खेल गतिविधियां आने वाले महीनों में भी जारी रहेंगी। जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच 11 और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन होना तय है। इनमें कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप, विश्व स्नूकर चैंपियनशिप, पैरा आर्चरी एशिया कप, वर्ल्ड सर्फ लीग के मुकाबले, एशियाई जूनियर शतरंज चैंपियनशिप तथा बैडमिंटन, फुटबॉल और रग्बी के कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट शामिल हैं।
मनसुख मंडाविया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी अब भारत के खेल विकास का अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन देश की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ खिलाड़ियों को मजबूत विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने का अवसर देते हैं। इससे खिलाड़ियों को विदेश जाकर प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर होने वाला खर्च भी कम होता है। साथ ही अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों को बड़े आयोजनों का अनुभव मिलता है, जिससे भविष्य के लिए मजबूत खेल व्यवस्था तैयार होती है। उन्होंने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की तैयारी के लिए देशभर के अलग-अलग शहरों में प्रतियोगिताओं की मेजबानी से मिला अनुभव काफी उपयोगी साबित होगा और इससे भारत की आयोजन क्षमता और मजबूत होगी।
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मंत्रालय का मानना है कि 2025 से 2028 के बीच 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी भारत को दुनिया के प्रमुख खेल आयोजक देशों में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। इससे न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की खेल सुविधाओं, खिलाड़ियों और आयोजन क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।