फ्रांस को फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में स्पेन के खिलाफ 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम के हेड कोच डिडियर डेसचैम्प्स ने माना है कि फ्रांस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में पूरी तरह से नाकाम रहा।
कोच ने कहा कि फ्रांस न तो अटैक में प्रभावी दिखा और न ही तकनीकी रूप से अपने सामान्य स्तर का खेल खेल सका। डेसचैम्प्स के अनुसार, फ्रांस को अपना अटैकिंग गेम न खेलने का खामियाजा सेमीफाइनल में भुगतना पड़ा। इस हार के साथ फ्रांस का शानदार नॉकआउट रिकॉर्ड भी टूट गया। 2014 विश्व कप में जर्मनी से क्वार्टर फाइनल हारने के बाद यह पहला मौका है, जब फ्रांस को विश्व कप के नॉकआउट मैच में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले, टीम लगातार 11 नॉकआउट मैचों में अजेय रही थी, जिसमें 10 जीत और एक ड्रॉ शामिल था।
मैच के बाद डेसचैम्प्स ने कहा कि पूरी टीम इस हार से बेहद निराश है क्योंकि सभी की नजरें फाइनल पर थीं। उन्होंने कहा, "जाहिर है कि हम बहुत निराश हैं। हमारा लक्ष्य फाइनल में पहुंचना था, लेकिन हमें यह मानना होगा कि स्पेन ने मैच पर पूरी तरह से नियंत्रण बनाए रखा। खिलाड़ी बहुत दुखी हैं क्योंकि हमारी उम्मीदें बहुत ऊंची थीं। हालांकि, हमें यह मानना होगा कि हम तकनीकी रूप से अपने सामान्य स्तर से थोड़ा नीचे थे और ऐसी टीम का सामना कर रहे थे जिसने वास्तव में खेल पर अपनी पकड़ बना रखी थी।
"यह मुख्य रूप से हमारी अपनी गलती है। हम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए और अटैक में उतने खतरनाक नहीं थे जितने हो सकते थे। हमने पासिंग में कुछ तकनीकी गलतियां की, जिनसे गोल करने के मौके बन सकते थे। एलीट लेवल पर यही सच्चाई है, भले ही यह दुखद हो। हमने उस तरह से फुटबॉल नहीं खेला जैसा हम खेलना पसंद करते हैं, और हमको इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।"
डलास स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में स्पेन ने 22वें मिनट में मिकेल ओयारजाबल ने पेनल्टी की मदद से स्पेन को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद दूसरे हाफ में पेड्रो पोरो ने एक और गोल कर टीम की बढ़त को 2-0 कर दिया। इसके बाद फ्रांस मुकाबले में वापसी नहीं कर सका। जब उनसे पूछा गया कि क्या फ्रांस को फुटबॉल का सबक सिखाया गया है, तो डेसचैम्प्स ने लुइस डे ला फुएंते की टीम की गुणवत्ता को स्वीकार किया और साथ ही अपनी टीम की तकनीकी कमियों पर अफसोस जताया।
उन्होंने कहा, "स्पेन एक बहुत मजबूत टीम है और खिलाड़ियों ने इस मुकाबले में फिर से यह साबित कर दिया। हमने अपने सामान्य स्तर पर प्रदर्शन नहीं किया। हमने अपने पिछले मैचों की तुलना में अधिक तकनीकी गलतियां कीं। खिलाड़ियों ने तैयार होने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन हम निश्चित रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके।"
डेसचैम्प्स ने कहा कि स्पेन के मजबूत डिफेंस ने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने माना कि जब टीम का अटैक और तकनीकी खेल दोनों कमजोर पड़ जाएं, तो मजबूत विपक्ष के खिलाफ जीतना बहुत मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, "स्पेन ने बेहतरीन डिफेंस किया और हमें बहुत कम जगह दी। हम सही समाधान नहीं खोज सके और हमारी तकनीकी गलतियों ने हमारी मुश्किलें और बढ़ा दीं।"
मैच के दौरान फ्रांस को एक और झटका तब लगा जब सेंट्रल डिफेंडर विलियम सालिबा चोटिल होकर पहले हाफ में ही मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह मैक्सेंस लैक्रोइक्स को उतारा गया। इस बदलाव पर डेसचैम्प्स ने कहा, "यह मेरा फैसला था। सालिबा चोटिल थे और मैं किसी दूसरे खिलाड़ी के साथ अतिरिक्त जोखिम नहीं लेना चाहता था। उस समय मुझे यही सबसे सही फैसला लगा।"
डेसचैम्प्स ने कहा कि स्पेन के मजबूत डिफेंस ने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने माना कि जब टीम का अटैक और तकनीकी खेल दोनों कमजोर पड़ जाएं, तो मजबूत विपक्ष के खिलाफ जीतना बहुत मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, "स्पेन ने बेहतरीन डिफेंस किया और हमें बहुत कम जगह दी। हम सही समाधान नहीं खोज सके और हमारी तकनीकी गलतियों ने हमारी मुश्किलें और बढ़ा दीं।"
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उन्होंने कहा, "अभी इस बारे में बात करने का सही समय नहीं है। मुझे इस टीम की उपलब्धियों पर गर्व है। हमने 2018 में विश्व कप जीता, 2022 में फाइनल खेला और अब फिर से सेमीफाइनल तक पहुंचे। आज हमें अपनी हार स्वीकार करनी होगी और स्पेन को बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई देनी होगी। यही शीर्ष स्तर के फुटबॉल की सच्चाई है।"