एन. जगदीशन हर घरेलू सीजन की शुरुआत अपने दिमाग में आंकड़ों का हिसाब लगाकर किया करते थे। वह सोचते थे कि पहले मैच और दूसरे मुकाबले में कितने रन बनाने होंगे, ताकि सीजन के अंत तक उनके आंकड़े इतने प्रभावशाली हों कि चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाए। भारत के लिए खेलने की चाह में यह तरीका भले ही सही लग रहा था, लेकिन लगातार आंकड़ों और चयन की चिंता उन्हें अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी।
मंगलवार से भारत-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच अनाधिकारिक टेस्ट मैच शुरू होगा, जिससे पहले जगदीशन ने 'आईएएनएस' के साथ खास बातचीत में कहा, "मैं भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए बहुत प्रेरित था और टीम में जगह बनाने के लिए, घरेलू सर्किट में मुझे क्या करना है, यह मैंने सीजन शुरू होने से पहले ही सोच लिया था। मेरे अपने लक्ष्य थे कि पहले और दूसरे मैच में कितने रन बनाने हैं, कितना स्कोर करना है? लेकिन जब आप असल में ऐसा कोई योजना बनाते हैं, तो अक्सर चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं और अचानक, जब काम योजना के हिसाब से नहीं होता, तो आप पर बहुत दबाव आ जाता है। एक बार जब दबाव हावी हो जाता है, तो आप अपना स्वाभाविक खेल नहीं खेल पाते और खेल का लुत्फ भी नहीं उठा पाते।"
उन्होंने कहा, "आप बस बहुत ज्यादा दबाव लेने लगते हैं और मैदान पर खुलकर नहीं खेल पाते। मेरे करियर में एक समय ऐसा था जब मैं बहुत दबाव महसूस कर रहा था - चयन, अपने नतीजों, कितने रन बना रहा हूं, इन सब चीजों के बारे में सोच रहा था। तो, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था और यह कोई अच्छा एहसास नहीं था, क्योंकि खेल के लिए जो प्यार था, वह कहीं खो गया था। इसलिए, मैं बस खेल के लिए अपना प्यार वापस पाना चाहता था, क्योंकि जिस दिन मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, मेरा मकसद बस खेल का लुत्फ उठाना था, न कि किसी और चीज के बारे में सोचना।"