नीदरलैंड्स महिला क्रिकेट टीम अगले महीने होने वाले विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में पहली बार खेलती नजर आएगी। टीम की कप्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज़ बैबेट डी लीडे करेंगी, जो इस ऐतिहासिक मौके को लेकर काफी उत्साहित हैं। बैबेट ने हाल ही में बातचीत के दौरान बताया कि वर्ल्ड कप तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने सिर्फ 14 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया था और अब 12 साल बाद वो नीदरलैंड्स को वर्ल्ड कप में लीड करने जा रही हैं। डी लीडे के लिए ये किसी सपने के सच होने जैसा है। उनका कहना है कि ये टूर्नामेंट सिर्फ एक क्रिकेट इवेंट नहीं, बल्कि दुनिया को अपना टैलेंट दिखाने का बड़ा मौका है। उनका मानना है कि अगर टीम अच्छा प्रदर्शन करती है, तो खिलाड़ियों को दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीग्स में खेलने का मौका मिल सकता है। उन्होंने ये भी बताया कि नीदरलैंड्स में क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है। वहां ज़्यादातर खिलाड़ी क्रिकेट के साथ-साथ पढ़ाई या नौकरी भी करते हैं। बैबेट खुद इकोनॉमेट्रिक्स की पढ़ाई कर चुकी हैं और उनके लिए पढ़ाई और क्रिकेट को साथ संभालना आसान नहीं था। नीदरलैंड्स की टीम ने इस वर्ल्ड कप के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वालिफाई किया। टीम ने ग्लोबल क्वालिफायर में लगातार पांच मैच जीतकर सबको चौंका दिया। बैबेट ने बताया कि 2024 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई न कर पाने के बाद टीम ने अपनी गलतियों पर काफी मेहनत की और उसी का नतीजा अब देखने को मिल रहा है। अगर आप बैबेट के बारे में नहीं जानते हैं तो बता दें कि उनका क्रिकेट से रिश्ता भी काफी खास है। उनके चाचा टिम डी लीडे नीदरलैंड्स के पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं, जिन्हें 2003 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के लिए आज भी याद किया जाता है। उन्होंने उस मैच में भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को भी आउट किया था और सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं उनके चचेरे भाई बास डी लीड भी नीदरलैंड्स पुरुष टीम के अहम खिलाड़ी हैं।Also Read: LIVE Cricket Score
उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए कहा, "मैं एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जहां क्रिकेट का माहौल था, इसलिए बचपन में मैं अपने छोटे भाई के साथ घर के अंदर ही क्रिकेट खेला करती थी। जब मैं सात साल की थी, तब मैंने एक हॉकी और क्रिकेट क्लब जॉइन किया था। नीदरलैंड्स में लड़कियों के लिए अलग से कोई प्रतियोगिता आयोजित करने लायक़ पर्याप्त लड़कियां नहीं होतीं, इसलिए आपको लड़कों के साथ ही खेलना पड़ता है। इस चीज़ ने मेरे खेल को निखारने में काफ़ी मदद की और आज भी मैं अपने क्लब के लिए पुरुषों के साथ ही क्रिकेट खेलती हूं। जब मैं 10 साल की थी, तब मेरा चयन डच U13 लड़कियों की टीम में हुआ था और 14 साल की उम्र में मैंने इंग्लिश घरेलू प्रतियोगिता में डच टीम के लिए एक विकेटकीपर के तौर पर अपना पहला मैच खेला था।"
अब बैबेट और उनकी टीम की कोशिश होगी कि अपने चाचा और भाई की तरह वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन करके महिला क्रिकेट को नीदरलैंड्स में नई पहचान दिलाई जाए। बता दें कि विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप का पहला मैच 12 जून को इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा।