Tree In Cricket Stadium St Lawrence Ground, Canterbury: क्रिकेट का मैदान हरा-भरा होता है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा इंटरनेशनल मैदान देखा है, जहां बाउंड्री के अंदर ही एक बड़ा पेड़ खड़ा हो? और इतना ही नहीं, उस पेड़ के लिए क्रिकेट के अलग नियम भी बनाए गए हों।
यह कोई कहानी नहीं, बल्कि इंग्लैंड के कैंटरबरी स्थित सेंट लॉरेंस ग्राउंड की सच्चाई है।
करीब दो सौ साल पुराना लाइम का पेड़ उस समय भी वहां मौजूद था, जब 1847 में मैदान बनाया गया। तब इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरूआत भी नहीं हुई थी। मैदान बनाने वालों ने पेड़ को काटने के बजाय उसके चारों ओर क्रिकेट ग्राउंड तैयार कर दिया। धीरे-धीरे यह पेड़ दुनिया के सबसे अनोखे क्रिकेट वेन्यू में शामिल हो गया।
पेड़ के कारण अलग नियम
क्रिकेट के इतिहास में शायद यह इकलौता ऐसा मशहूर मैदान था जहां एक पेड़ सिर्फ दर्शनीय नहीं था, बल्कि खेल के नियमों का भी हिस्सा था। इस मैदान पर एक स्थानीय नियम लागू था। अगर बल्लेबाज़ का शॉट पेड़ की किसी भी शाखा या तने से टकराता, तो उसे चार रन दिए जाते थे। भले ही गेंद टकराकर वापस मैदान में आ जाए या फिर उसके बाद बाउंड्री पार कर जाए, रन सिर्फ चार ही माने जाते थे। इतना ही नहीं, पेड़ से टकराकर लौटने वाली गेंद पर लिया गया कैच भी मान्य नहीं होता था। यह नियम सिर्फ इसी मैदान के लिए बनाया गया था।
इंटरनेशनल क्रिकेट भी खेला गया
यह सिर्फ काउंटी क्रिकेट का मैदान नहीं था। यहां कई वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए, जिनमें 1999 वर्ल्ड कप के मैच भी शामिल थे। यहां पुरुष इंटरनेशनल क्रिकेट में पहला मैच 1999 वनडे वर्ल्ड कप था, जो मेजबान इंग्लैंड औऱ केन्या के बीच खेला गया था।
यहां महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में कई मुकाबले खेले गए। यह पहला इंटरनेशनल (महिला) मैच 1976 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच और आखिरी मैच मई 2026 में इंग्लैंड महिला टीम और न्यूजीलैंड महिला टीम के बीच खेला गया।
पेड़ के ऊपर से छक्का
इस पेड़ के ऊपर से गेंद मारना आसान नहीं था। इसकी ऊंचाई करीब 90 फीट तक पहुंचती थी। क्रिकेट इतिहास में आधिकारिक रूप से चार बल्लेबाज़ ही इसके ऊपर से गेंद निकाल पाए। जिसमें आर्थर वॉटसन (साल 1925), लेरी कॉन्स्टेंटाइन (साल 1929), जिम स्मिथ (1939) और शामिल हैं। इसलिए इस पेड़ के ऊपर से लगाया गया छक्का किसी रिकॉर्ड से कम नहीं माना जाता था।
2005 में इस कारण टूटा पेड़
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जनवरी 2005 में तेज़ तूफानन आया। लगभग दो सदियों से क्रिकेट का गवाह बना यह पेड़ टूटकर गिर गया। बाद में उसकी लकड़ी से स्मृति-चिह्न बनाए गए और उसी मैदान पर नया लाइम का पेड़ लगाया गया, ताकि यह विरासत आगे बढ़ती रहे।