West Indies: भारतीय बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ ने माना कि इंटरनेशनल मैचों के बीच लंबे गैप से थोड़ी घबराहट होती है। उन्होंने कहा कि टॉप लेवल पर अपनी रेगुलर ओपनिंग भूमिका से मिडिल ऑर्डर में शिफ्ट होने में अलग-अलग चुनौतियां होती हैं, जिसमें तकनीकी बदलाव करना भी शामिल है।
गायकवाड़ अपने करियर में ज्यादातर ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में खेलते नजर आए हैं। हालांकि, जब भी भारतीय टीम में मध्यक्रम में जगह खाली हुई, उन्होंने चौथे नंबर पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी निभाई है। अब तक खेले गए 10 वनडे मैचों में गायकवाड़ ने एक शतक और एक अर्धशतक की मदद से 241 रन बनाए हैं, जिससे उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है।
गायकवाड़ ने ब्रॉडकास्टर संग बात करते हुए कहा, "बहुत अंतर है। मैंने जैसा कहा कि फर्स्ट-क्लास लेवल पर 100 से ज्यादा पारियों में ओपनिंग की है। इसी वजह से मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करना, खासकर इंटरनेशनल क्रिकेट में अलग-अलग चुनौतियां लेकर आता है। आपको स्ट्राइक रोटेट करनी होती है। आपको यह पक्का करना होता है कि आप सही विकल्प चुनें।"
भारतीय बल्लेबाज ने कहा, "अक्सर जब हम पावरप्ले में बैटिंग करते हैं, तो आसान बाउंड्री मिल जाती हैं, फील्डर अंदर होते हैं। हालांकि, मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते समय आपको बस यह पक्का करना होता है कि आप जरूरी बदलाव करें और मैंने जैसा कहा कि अपनी ताकत पर भरोसा रखें, चाहे वह कुछ भी हो।"
भारत के लिए फिर से खेलने को लेकर गायकवाड़ में घबराहट है, जो तिरुवनंतपुरम में 8 विकेट से मिली जीत में 13 रन पर नाबाद रहे थे। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो, वह बहुत पहले की बात है (दिसंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक)। उसके बीच मैंने कई पारियां खेलीं। जाहिर है कि आईपीएल भी था। इसलिए अलग-अलग कंडीशन में खेला, अलग-अलग नंबर पर खेला। जाहिर है कि लंबे समय बाद इंटरनेशनल लेवल पर वापसी करने पर थोड़ी घबराहट तो होती ही है। हालांकि मुझे लगता है कि पिछले गेम में मैदान पर जाकर थोड़ी देर टिके रहना बेहतर रहा।"
भारतीय बल्लेबाज ने कहा, "अक्सर जब हम पावरप्ले में बैटिंग करते हैं, तो आसान बाउंड्री मिल जाती हैं, फील्डर अंदर होते हैं। हालांकि, मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते समय आपको बस यह पक्का करना होता है कि आप जरूरी बदलाव करें और मैंने जैसा कहा कि अपनी ताकत पर भरोसा रखें, चाहे वह कुछ भी हो।"
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Article Source: IANS