मेलबर्न/नई दिल्ली, 27 दिसंबर (CRICKETNMORE) । पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर बहुचर्चित बहिष्कार की घटना के लगभग तीन दशक बाद विरोध जताने के अपने तरीके पर आज खेद जताया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1981 की श्रृंखला खराब अंपायरिंग के कारण प्रभावित रही थी।

गावस्कर ने आज तीसरे टेस्ट मैच में चाय के विश्राम के दौरान संजय मांजरेकर और कपिल देव के साथ कार्यक्रम में कहा, ‘‘मुझे उस फैसले पर खेद है। वह मेरी तरफ से बड़ी गलती थी। भारतीय कप्तान होने के नाते मुझे उस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था। मैं किसी भी तरह से अपनी हरकत को सही साबित नहीं कर सकता। मैं आउट था या नहीं, मुझे उस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था। ’’गावस्कर ने कहा, ‘‘यदि आज के जमाने में ऐसी घटना घटी होती तो मुझ पर जुर्माना लग जाता। ’

बता दें कि 1981 के उस टेस्ट में डेनिस लिली की इनकटर पर अपने तीसरे टेस्ट मैच में अंपायरिंग कर रहे रेक्स वाइटहेड ने गावस्कर को पगबाधा आउट दे दिया। गावस्कर का मानना था कि गेंद उनके बल्ले को छूकर पैड पर लगी। वह क्रीज से नहीं हटे और उन्होंने अपना विरोध जताया। गावस्कर ने अपना बल्ला पैड पर पटका ताकि अंपायर उनकी नाराजगी को समझ सकें।

गावस्कर जब बेमन से पवेलियन लौट रहे थे तभी रिपोर्टों के अनुसार लिली ने कोई टिप्पणी कर दी जिससे बात बिगड़ गयी। गावस्कर वापस आये और उन्होंने साथी सलामी बल्लेबाज चेतन चौहान को भी क्रीज छोड़ने की हिदायत दे डाली। चौहान ने वही किया जो कप्तान ने उन्हें कहा लेकिन सीमा रेखा पर टीम मैनेजर शाहिद दुर्रानी और सहायक मैनेजर बापू नाडकर्णी ने उन्हें रोक दिया। चौहान वापस अपनी पारी आगे बढ़ाने के लिये क्रीज पर आ गये जबकि गावस्कर पवेलियन लौट गये।

कपिल देव उस समय काफी युवा थे और उनका यह केवल दूसरा विदेशी दौरा था। उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट लिये और आस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में 83 रन पर ढेर करने में अहम भूमिका निभायी। भारत इससे तीन मैचों की श्रृंखला 1-1 से बराबर करने में सफल रहा।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनील/गोविन्द

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Saurabh Sharma
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