Cameron Cuffy: क्रिकेट इतिहास में प्लेयर ऑफ द मैच आमतौर पर बड़ी पारी खेलने वाले या सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी को मिलता है। लेकिन वनडे इंटरनेशनल इतिहास का एक वाकया ऐसा भी है जब एक ऐसे खिलाड़ी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जिन्होंने ना कोई विकेट लिया, ना कोई रन बनाया और फील्डिंग में भी हाथ खाली रहे।
हम बात कर रहे हैं वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कैमरन कफी की। 6 फुट 7 इंच लंबे इस धाकड़ गेंदबाज की तुलना अक्सर वेस्टइंडीज टीम में जोएल गार्नर और कर्टली एम्ब्रोस जैसे दिग्गजों से की जाती थी।
जिम्बाब्वे के खिलाफ किया था कामल
बात है 23 जून 2001 की और हरारे स्पोर्ट्स क्लब में कोका-कोला कप का पहला मुकाबला था, इस ट्राई सीरीज में तीसरी टीम भारत की थी।
पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने के बाद वेस्टइंडीज ने निर्धारित 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 266 रन बनाए। जिसमें डैरेन गंगा (66), क्रिस गेल (53) और औऱ शिवनारायण चंद्रपॉल (51) ने अर्धशतक जड़े।
उस समम वनडे क्रिकेट में 267 रन का लक्ष्य थोड़ा मुश्किल माना जाता था, लेकिन ओपनर एलिस्टेयर कैंपबेल के अर्धशतक और मिडिल ऑर्डर के शानदार प्रयास से जिम्बाब्वे मैच में बनी रही। जैसे-जैसे लक्ष्य का पीछा आगे बढ़ा, ऐसा लगने लगा कि मैच का अंत रोमांचक होगा। लेकिन कफी के कमाल वेस्टइंडीज ने बाजी मारकर मुकाबला जीत लिया। वेस्टइंडीज के लिए गेंदबाजी में मर्विन डिलन और मार्लन सैमुअल्स 3-3 विकेट लिए थे।
उनके आंकड़े देखकर हर कोई हैरान रह गया:
बल्लेबाजी: 0 रन
गेंदबाजी: 10 ओवर, 2 मेडन, सिर्फ 20 रन, 0 विकेट
कैच: 0
रन आउट: 0
फिर उन्हें अवॉर्ड क्यों मिला?
कफी ने विकेट नहीं लिए, लेकिन उन्होंने जिम्बाब्वे के बल्लेबाज़ों पर ऐसा दबाव बनाया कि दूसरे छोर से विकेट गिरते चले गए। 10 ओवर में सिर्फ 20 रन देना उस दौर के 50 ओवर के क्रिकेट में भी असाधारण रूप से किफायती स्पेल माना गया। उनकी कसी हुई गेंदबाजी ने रन गति रोक दी और बल्लेबाज़ों को जोखिम लेने पर मजबूर किया। इसी दबाव ने वेस्टइंडीज की जीत की नींव रखी।
उस पूरे कोका कोला कप में कफी ने 3 मैच में 3 विकेट ही हासिल किए थे।
8 साल लंबे अपने इंटरनेशनल करियर में कफी ने वेस्टइंडीज के लिए 15 टेस्ट और 41 वनडे मैच खेले, जिसमें उन्होंने क्रमश: 43 और 41 विकेट लिए। मजेदार बात ये है कि वह अपने वनडे इंटरनेशनल करियर में सिर्फ 2 बार ही प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे।