VVS Laxman and Rahul Dravid: ईडन गार्डन्स में टेस्ट के चौथे दिन (14 मार्च 2001) लक्ष्मण-द्रविड़ की मशहूर और शानदार 376 रन की पार्टनरशिप को 25 साल पूरे होने पर. पिछले दिनों याद किया गया। इस पार्टनरशिप की बदौलत भारत ने 171 रन से टेस्ट जीता और वह भी स्टीव वॉ की 'अपराजित' ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने 'फॉलोऑन' खेलने के बाद। ये सब किसी परी-कथा जैसा था और हालत ये हो गई कि स्टीव वॉ आज भी अपने उस 'फॉलो-ऑन' के फ़ैसले का अफ़सोस मनाते हैं।
सच तो ये कि भारत को सपोर्ट करने वालों ने भी ये नहीं सोचा था कि ऐसी ज़बरदस्त पार्टनरशिप होगी (जो लगभग दो दिन चली और 6वें विकेट के लिए) वीवीएस लक्ष्मण (उनके 281 को विजडन ने टेस्ट क्रिकेट की टॉप 10 पारियों में से एक गिना) और राहुल द्रविड़ (180 रन बनाते हुए ऐसा कमाल का सपोर्ट दिया जिसे बल्लेबाज़ी के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन में से एक गिनते हैं) के बीच। इस पार्टनरशिप ने, इस टेस्ट को, अब तक खेले सबसे बेमिसाल टेस्ट में से एक बना दिया। भारत 'फॉलो-ऑन' के बाद भी टेस्ट जीतने वाली सिर्फ तीसरी टीम बना और 'फॉलो-ऑन' के बाद सबसे बड़ी पार्टनरशिप का रिकॉर्ड बना।
भारत के कप्तान सौरव गांगुली बिल्कुल ठीक कहते हैं, 'मैं इससे महान किसी भी टेस्ट में शामिल नहीं रहा हूं। मुझे नहीं मालूम कि किस फार्मूले से ये टेस्ट जीते क्योंकि मैंने कुछ भी नहीं किया। ये तो बस हो गया।' दूसरी पारी में भारत ने 657/7 का स्कोर बनाकर हैरान कर दिया और 383 रन की लीड ने ऑस्ट्रेलिया पर ऐसा दबाव डाल दिया कि वे पूरी तरह से टूट गए। युवा स्पिनर हरभजन सिंह ने 6 विकेट लिए, जबकि सचिन तेंदुलकर ने तीन विकेट चटकाए और एक इतिहास रच दिया।
तब, ऑस्ट्रेलिया कोई कमजोर टीम नहीं थी, और उस पर 'फॉलो-ऑन' मिलने के बाद उन्हें हराना तो और भी ख़ास बन गया। कई लोग भारतीय क्रिकेट के लिए इसे वैसा ही ख़ास मोड़ मानते हैं जैसा 1983 का वर्ल्ड कप जीतना था। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के लगातार 16 टेस्ट मैच जीतने के रिकॉर्ड को रोक दिया। टेस्ट में खेल किस तरह आगे बढ़ा, इस पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे की कई अजीब और मजेदार स्टोरी भी हैं जिनसे टेस्ट के माहौल और मिजाज का खूब पता चलता है। ऐसे ही कुछ मजेदार पल और दिलचस्प फैक्ट:
* इस पारी में द्रविड़ को बल्लेबाजी के लिए नंबर 6 पर भेजना और लक्ष्मण को प्रमोशन के साथ ऊपर भेजना एक कमाल का मास्टर स्ट्रोक फैसला था।
* टेस्ट में खेले वेंकटपति राजू के अनुसार, जब ऑस्ट्रेलिया ने 'फॉलो-ऑन' दिया, तो लक्ष्मण ने उसी वक्त कह दिया था, 'हो सकता है हम यह मैच जीत जाएं।' ये सुनकर राजू हैरान रह गए क्योंकि उस वक्त इस बात पर यकीन करना बड़ा मुश्किल था। वैसे स्कोरकार्ड के हिसाब से राजू ने अपने इस आख़िरी टेस्ट में मार्क वॉ का विकेट लेने के अतिरिक्त बैट से 4 रन बनाए पर बैट से उन्होंने एक ऐसा ऐतिहासिक योगदान दिया जिसके बारे में मालूम ही नहीं है। विश्वास कीजिए लक्ष्मण ने 281 रन की वह ऐतिहासिक पारी, राजू से उधार मांगे बैट से खेली थी।
* सीरीज के मुंबई में पहले टेस्ट में सिर्फ 20 और 12 रन बनाने के बाद, लक्ष्मण बड़े निराश थे और उसी में साईं बाबा का आशीर्वाद लेने शिरडी चले गए। कोलकाता जाने से पहले, हैदराबाद गए तो वहां भी दो अलग-अलग मंदिर में दर्शन किए। वे कहते हैं इन सभी मंदिर में जाने से जो मानसिक शांति मिली, उसी से भारतीय क्रिकेट के इतिहास का रुख बदलने वाली बल्लेबाजी कर पाए।
* ऑस्ट्रेलिया के हेड कोच जॉन बुकानन को तो आज तक 'फॉलो-ऑन' के फैसले पर अफ़सोस है और मानते हैं कि भावनाओं में बहकर, वे ऐसा फ़ैसला ले गए थे। इसे 'कोच के तौर पर मेरा सबसे खराब फैसला' बताया। मजेदार फैक्ट ये कि इस कोलकाता टेस्ट के बाद स्टीव वॉ ने सात बार और फॉलो-ऑन दिया और हर बार टेस्ट जीते।
* टेस्ट से दो दिन पहले, लक्ष्मण की पीठ में ज़ोर का खिंचाव था, जिससे हिलने-डुलने में बड़ी मुश्किल हो रही थी पर फ़िज़ियो एंड्रयू लीपस ने उन्हें फ़िट कर दिया। द्रविड़ को भी टेस्ट से पहले वायरल बुखार था और मांसपेशियों में खिंचाव (cramping) की दिक्कत भी थी।
* जब ये शानदार पार्टनरशिप जमने लगी तो सौरव गांगुली ने सभी खिलाड़ियों से कहा कि जहां-जहां पार्टनरशिप शुरू होते वक्त बैठे थे, बस वहीं बैठे रहें।
* दूसरी पारी में जब गांगुली ने तेंदुलकर को गेंदबाजी के लिए बुलाया तो उनसे कहा था, 'तुम्हारे लिए बस एक ही ओवर है।' तेंदुलकर ने बहरहाल खतरनाक बल्लेबाज़ गिलक्रिस्ट (0), हेडन (67 : उस पारी के टॉप स्कोरर) और शेन वॉर्न (गुगली पर) को पवेलियन भेज दिया। कमाल की बात ये कि ये तीनों बल्लेबाज़, तेंदुलकर के पहले तीन में से, हर ओवर की तीसरी गेंद पर आउट हुए।
* पहली पारी में जब शेन वॉर्न बल्लेबाजी के लिए आए तो हरभजन हैट्रिक लेने के कगार पर थे। दो विकेट ले लिए थे। उस गेंद के लिए, फील्डर सदगोपन रमेश अपनी मर्ज़ी से थोड़ा दाईं ओर हटकर खड़े हो गए और संयोग ये कि गेंद सीधे उनके हाथों में चली गई। उस कैच की बदौलत बनी हैट्रिक से हरभजन इतने खुश थे रमेश को डिनर पर ले जाने का वायदा कर दिया। 25 साल हो गए हैं पर हरभजन ने डिनर नहीं कराया है और मजेदार बात ये कि हरभजन को वायदे वाली ये बात आज भी याद है।
* हार के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने गजब की खेल-भावना दिखाई और भारतीय ड्रेसिंग रूम में गए टीम इंडिया को जीत की बधाई देने। बाद में, स्टीव वॉ ने अपनी ऑटोबायोग्राफी का फोरवर्ड लिखने के लिए भी द्रविड़ से कहा।
* जब लक्ष्मण और द्रविड़ क्रीज पर जमे हुए थे, तब बल्लेबाज़ी के लिए अगला नंबर नयन मोंगिया का था। वह इनकी लंबी पार्टनरशिप के दौरान, पैड पहनकर बैठे रहे अपने नंबर के इंतजार में।
* भारतीय टीम के कोच जॉन राइट ने अपनी किताब 'इंडियन समर्स' में इस टेस्ट के बारे में बड़े विस्तार से ज़िक्र किया है; इस 'ईडन टेस्ट' का जिक्र जिस चेप्टर में है उसका हैडिंग 'लाज़रस के बाद की सबसे बड़ी वापसी (The Greatest Comeback since Lazarus)' लिखा है।
* ग्राउंड पर मौजूद दो अंपायरों में से एक, इंग्लैंड के पीटर विली (दूसरे: एसके बंसल), दूसरी बार किसी ऐसे टेस्ट में शामिल हुए जिसे 'फॉलो-ऑन' खेलने वाली टीम ने जीता। वे 1981 में लीड्स में हुए इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया ऐतिहासिक टेस्ट मैच में खेले थे।
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चरनपाल सिंह सोबती