दुनिया की सबसे बड़ी उम्र की टेस्ट क्रिकेटर एलीन ऐश का 110 साल की उम्र में निधन हुआ तो इस खबर में उनकी उम्र और उनके टेस्ट क्रिकेट रिकॉर्ड का ही थोड़ा सा जिक्र हुआ।असल में वे और भी बहुत कुछ थीं और उनके बारे में पूरी तरह से तभी पता लगेगा जब ये सब जानेंगे। 

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सबसे पहले उनकी क्रिकेट की बात करते हैं। इस दाएं हाथ की सीमर ने 1937 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध टेस्ट खेलना शुरू किया (डेब्यू करने वाली 7 खिलाड़ियों में से एक) और 1949 तक के करियर में, 7 टेस्ट में 10 विकेट लिए- 23.00 औसत से और साथ में 38 रन बनाए। कुल 22 फर्स्ट क्लास मैचों में 32 विकेट लिए और 180 रन बनाए।

नाम एलीन व्हेलन था। जब पाँच साल की थी तो पहला क्रिकेट सेट मिला और उससे इतना प्यार था कि सोने के वक़्त भी बैट, गेंद और स्टंप को बिस्तर पर अपने पास रखती थीं। कैथोलिक कॉन्वेंट के उस स्कूल में पढ़ीं जहां क्रिकेट खेलना मना था और एक बार क्रिकेट खेलते पकड़े जाने पर स्कूल से निकाले जाने की नौबत आ गई थी।  

सबसे पहले मिडलसेक्स के लिए खेलीं- ये वो समय था जब लड़कियां लंबे सफेद मोजे और सफेद फलालैन स्कर्ट पहनकर खेलती थीं। लगभग 60 या 70 मील प्रति घंटे की तेजी से गेंदबाजी करती थीं और एक स्पेल में 16 से 18 ओवर तक फेंक सकती थीं। 1939 में ऑस्ट्रेलिया टूर के लिए इंग्लैंड की टीम में चुनी गईं- तब टूर का खर्चा खिलाड़ी खुद उठाती थीं। इसीलिए पैसा इकठ्ठा करने के लिए द रेस्ट के विरुद्ध कोलवाल में एक मैच खेला। साथ के लिए बॉल गाउन और कॉकटेल पार्टियों के लिए ड्रेस, किट और कपड़े भी खरीद लिए पर इससे पहले कि टूर शुरु होता- वर्ल्ड वॉर शुरु हो गया। उन्हें आखिर तक ये अफ़सोस रहा कि अपनी क्रिकेट के कुछ सबसे अच्छे साल वर्ल्ड वॉर के कारण गंवा दिए। विश्वास कीजिए वे अपने 100 साल के बाद जीने के लिए इसी वर्ल्ड वॉर को जिम्मेदार मानती थीं- जो साल वॉर में गंवाए, वे बोनस में अब मिल गए। 

उन्हें 1948-49 के ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड टूर के लिए चुना गया। तब भी किराया खुद दिया। इंग्लैंड पहली बार एशेज हार गया और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इसी के साथ टेस्ट करियर ख़त्म हो गया। टेस्ट में अच्छा नहीं खेल पाईं पर स्टेट मैचों में बेहतर खेलीं।  

उम्र की बात करें तो 100 साल तक पहुंचने वाली एकमात्र महिला टेस्ट क्रिकेटर और सबसे ज्यादा जीने वाले पुरुष क्रिकेटर दक्षिण अफ्रीका के नॉर्मन गॉर्डन (1911-2014) से सात साल ज्यादा जीवित रहीं।

शादी से पहले नाम एलीन व्हेलन था। पोस्ट ऑफिस में नौकरी की। साथ में क्रिकेट खेली- सिविल सर्विस स्पोर्ट्स क्लब के लिए। तब विमेंस क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेट्री का काम भी देख रही थीं।  

शादी के बाद नाम एलीन ऐश हो गया- ये वही एलीन थीं जिन्हें 2017 आईसीसी महिला वर्ल्ड कप फाइनल की औपचारिक शुरुआत के प्रतीक वाली, लॉर्ड्स में घंटी बजाने का सम्मान दिया गया था। मेजबान इंग्लैंड ने रोमांचक फाइनल में भारत को हराकर चैंपियन का टाइटल जीता था। इससे भी ख़ास बात ये कि वे मैच के दौरान बैठी रहीं- प्रेसीडेंट्स बॉक्स में शैंपेन पी रही थीं और जॉन मेजर के साथ फ़्लर्ट। गज़ब की एनर्जी थी,उनमें।

इस वर्ल्ड कप फाइनल से पहले इंग्लैंड की क्रिकेटर हीदर नाइट, एलीन से मिलने गईं- तब वे 105 साल की थीं। जोश देखिए- हीदर को योग सिखाया, स्नूकर खेला, अखबारों और स्क्रैपबुक के जरिए अपने 1930 और 1940 के दौर के क्रिकेट सफर की दास्तान सुनाई। आखिर तक महिला क्रिकेट के बारे में बात करती रहीं। इस बात से खुश थीं कि अब जिस तरह से इसे चलाया जाता है उससे क्रिकेटरों को फायदा हो रहा है पर अपने सुनहरे दिनों की  क्रिकेट को बेहतर मानती थीं ।

ऐश ने इसी खुशी, मुस्कान, हर रोज वाइन (दिन में दो गिलास रेड वाइन) और योग को अपने कामयाब और लंबे जीवन का मंत्र माना- 100 साल की गिनती  तक पहुंचने के बाद भी योग करती रहीं। जब 106 वां जन्मदिन था तो उसे मनाने उन्हें टाइगर मोथ ले गए- हवाई सैर कराई। सफर की थकान उतारने के लिए क्या वे आराम करना चाहेंगी- यह पूछे जाने पर उनका जवाब था : "नहीं, बस थोड़ी सी वाइन पिला दो।"  98 साल की उम्र तक गोल्फ खेला।

पता है अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सम्पति किसे माना- सर डॉन ब्रैडमैन के ऑटोग्राफ वाला बैट। उनसे कई बार मिलीं पर वे ऑटोग्राफ नहीं देते थे। आखिर में 1949 में सिडनी में उस फ्रांसीसी रेस्तरां में पहुंच गईं जहां ब्रैडमैन कुछ मेहमानों के साथ डिनर कर रहे थे- मेहमानों के सामने ब्रैडमैन मना नहीं कर पाए। इस कीमती बैट को चोरी से बचाने के लिए आखिर तक बिस्तर पर अपने साथ रखा।  

पिछले दिनों लॉर्ड्स में इंग्लिश क्रिकेटर रशेल हेहो फ्लिंट की मूर्ति लगाने पर बड़ी बहस चली- तब ये बात भी चर्चा में आई थी कि रशेल से भी पहले ये सम्मान एलीन को मिलना चाहिए।  आखिर में हेहो-फ्लिंट के सम्मान में नार्थ गेट का नाम बदल दिया। एमसीसी ने एलीन ऐश को ऑनरेरी मेम्बरशिप दी और एक अद्भुत सहूलियत- वे अपनी मिनी को पुरुष चीफ एक्जीक्यूटिव के ड्राइववे में पार्क कर सकती हैं। उन्हें अपनी इस 'मिनी' से बड़ा प्यार था- इसे खुद चलाती थीं।  

अब जबकि उनकी पीली मिनी का जिक्र आ ही गया तो एक बड़ी अनोखी बात आपको बता दें- वे बिना लाइसेंस सालों ड्राइविंग करती रहीं और कभी चालान नहीं हुआ। सच ये है कि उनका जन्म ड्राइविंग लाइसेंस का सिस्टम शुरु होने से भी 23 साल पहले हुआ था और उन जैसों को ख़ास छूट दी गई।  

एक टेलीविज़न डॉक्यूमेंट्री, 100-ईयर-ओल्ड ड्राइवर्स राइड अगेन में एक्टिंग भी की। जब वह 105 साल की थीं तो ड्राइविंग के दौरान मिनी के विंग मिरर को तोड़ लिया। तब उन्हें कहा गया कि वे ड्राइविंग लाइसेंस लें। सिर्फ दो महीने से भी कम में अपना ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए तैयार थीं। ये कितनी बड़ी घटना थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईटीवी रियलिटी शो 100-ईयर-ओल्ड ड्राइविंग स्कूल पर इसका लाइव टेलीकास्ट किया गया। वे ड्राइविंग टेस्ट में पास हो गईं और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस मिला।  

ऐश ने वर्ल्ड वॉर के दौरान ब्रिटिश सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस, MI6 के लिए भी काम किया। वॉर के दौरान एक चैरिटी मैच खेला- महिला क्रिकेट बनाम ब्रिटिश सेना। MI6 के लिए 11 साल काम किया- क्या ड्यूटी थी उनकी, इस बारे में कभी बात नहीं की।

2019 में एलीन ऐश की पोर्ट्रेट लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड की गैलरी में लगाई गई। इस मौके पर एलीन ने कहा- 'यह अद्भुत सम्मान है।' तब स्टेडियम में दूसरे एशेज टेस्ट के चौथे दिन का खेल चल रहा था। वे क्रिकेट से 5 साल की उम्र में जुड़ीं और आखिर तक जुड़ी रहीं। इसीलिए ख़ास हैं। 


लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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