दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) को निर्देश दिया कि वह पहलवान विनेश फोगाट को जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते में फैसला ले। इसके साथ ही, कोर्ट ने एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल से बाहर किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को बेअसर मानकर खारिज कर दिया।

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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि यह रिट याचिका अब बेअसर हो गई है, क्योंकि पहले के अदालती आदेशों के तहत फोगाट को सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई थी।

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याचिका का निपटारा करते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई को निर्देश दिया कि वह 9 मई को फोगाट को जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते के भीतर फैसला लेते हुए रेसलर और कोर्ट को इसकी जानकारी देने के बाद नतीजे को रिकॉर्ड पर लाए।

फेडरेशन ने जस्टिस शर्मा को यह भरोसा भी दिलाया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई में कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले फोगाट को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान, फोगाट के वकील ने तर्क दिया कि याचिका में डब्ल्यूएफआई की चयन नीति से जुड़े बड़े मुद्दे भी उठाए गए थे।

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मुद्दों के लिए अलग से चुनौती देने की जरूरत होगी और मौजूदा कार्रवाई को निपटाया जा सकता है, साथ ही पहलवान को नई रिट याचिका दायर करने की छूट भी दी। अपने आदेश में, जस्टिस शर्मा ने कहा कि फोगाट पहले ही सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा ले चुकी हैं, इसलिए भाग लेने से मना किए जाने को चुनौती देने का मामला अब सुनवाई के लायक नहीं रहा।

उल्लेखनीय है कि यह विवाद तब शुरू हुआ था, जब सिंगल-जज बेंच ने डब्ल्यूएफआई की बात सुने बिना फोगाट को 30-31 मई को होने वाले एशियन गेम्स सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

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इसके साथ ही, जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार ने फेडरेशन को निर्देश दिया था कि वह पहलवान के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को तार्किक नतीजे तक पहुंचाए और सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपने फैसले को रिकॉर्ड पर लाए।

इसके बाद फोगाट दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के पास गईं, जिसने उन्हें सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व को किसी महिला एथलीट को पेशेवर मौकों से बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने डब्ल्यूएफआई के बदले हुए पात्रता मानदंड पर सवाल उठाते हुए निर्देश दिया था कि चयन प्रक्रिया की वीडियो-रिकॉर्डिंग स्वतंत्र पर्यवेक्षक की देखरेख में की जाए।

डब्ल्यूएफआई ने उस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सिलेक्शन ट्रायल को जारी रखने की अनुमति देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट की अंतरिम स्टेज पर की गई कुछ टिप्पणियों पर चिंता जताई।

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इसके बाद, सिलेक्शन ट्रायल पूरे होने पर, सुप्रीम कोर्ट ने फेडरेशन की स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) को बेअसर मानते हुए इसका निपटारा कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को डब्ल्यूएफआई के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणियों की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि फोगाट की वापसी की कोशिश को 30 और 31 मई को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में झटका लगा था। महिला 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें मीनाक्षी गोयत के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ वह जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने में असफल रहीं।

इसके बाद, सिलेक्शन ट्रायल पूरे होने पर, सुप्रीम कोर्ट ने फेडरेशन की स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) को बेअसर मानते हुए इसका निपटारा कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को डब्ल्यूएफआई के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणियों की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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फेडरेशन ने उन्हें 26 जून तक डब्ल्यूएफआई से मंजूरी प्राप्त प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई और एशियन गेम्स सिलेक्शन ट्रायल के लिए बदले हुए पात्रता मानदंड, दोनों को चुनौती दी।

Article Source: IANS

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