भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली से विरोधी गेंदबाजों को हमेशा दबाव में रखा। यह बेखौफ बल्लेबाज तेजी से रन बनाने के लिए मशहूर रहा। सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानने वाले सहवाग ने मास्टर-ब्लास्टर के बल्लेबाजी अंदाज को अपनाकर आक्रामक शैली के मामले में उनसे भी ज्यादा नाम कमाया।

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20 अक्टूबर 1978 को नजफगढ़ में जन्मे वीरेंद्र सहवाग ने सचिन के खेलने के अंदाज, शॉट चयन और मैदान पर मानसिक तैयारी से सीख ली। वह बचपन से ही सचिन की बल्लेबाजी को देखकर अपने खेल में धैर्य, तकनीक और आक्रामकता का संतुलन अपनाने की कोशिश करते थे।

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सहवाग ने 1997/98 में घरेलू क्रिकेट करियर की शुरुआत की, जिसमें शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम इंडिया में भी मौका मिला।

1 अप्रैल 1999 को वीरेंद्र सहवाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया। यह मैच मोहाली में पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया था, जिसमें सहवाग महज 1 ही रन बना सके, लेकिन उन्होंने नाकामी से सीखते हुए अपने चौथे ही वनडे मैच में अर्धशतकीय पारी खेली। इसके बाद साल 2001 में वीरू को टेस्ट में डेब्यू का भी मौका मिला।

वीरेंद्र सहवाग की सटीक टाइमिंग और ताकतवर शॉट खेलने की क्षमता उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। स्क्वायर कट उनका सबसे पसंदीदा शॉट रहा, जिसका वह भरपूर इस्तेमाल करते थे।

शानदार फुटवर्क , बेहतरीन टाइमिंग और हाथों की असाधारण ताकत और गति के चलते सहवाग ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के साथ सुर्खियां बटोरनी शुरू की। मार्च 2004 में सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट में 375 गेंदों का सामना करते हुए 309 रन बनाए। उनकी इस पारी में 6 छक्के और 39 चौके शामिल रहे। भारत ने यह मैच पारी और 52 रन से अपने नाम किया।

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सहवाग इतने निडर थे कि उन्होंने इस तिहरे शतक को छक्के के साथ पूरा किया था, जबकि दो मैच पहले ही वह महज 5 रन से अपना पहला दोहरा शतक चूक गए थे। यह किसी भारतीय खिलाड़ी का टेस्ट क्रिकेट में पहला तिहरा शतक था। इस पारी ने ही उन्हें 'मुल्तान का सुल्तान' बना दिया।

मार्च 2008 में सहवाग ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में खेले गए टेस्ट मैच में 319 रन की पारी खेली, लेकिन दिसंबर 2009 में श्रीलंका के विरुद्ध महज 7 रन से तीसरा तिहरा शतक चूक गए।

8 दिसंबर 2011 को इंदौर में वीरेंद्र सहवाग ने वेस्टइंडीज के विरुद्ध 219 रनों की पारी खेली थी। सहवाग दोहरा शतक जड़ने वाले दूसरे भारतीय थे। उनसे पहले सचिन तेंदुलकर यह कारनामा कर चुके हैं।

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वीरेंद्र सहवाग टेस्ट मैच के एक ही दिन में सर्वाधिक रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं। वीरू ने श्रीलंका के विरुद्ध दिसंबर 2009 में खेले गए टेस्ट मैच में एक ही दिन 284 रन बनाए थे।

वीरेंद्र सहवाग ने भारत की ओर से 104 टेस्ट मुकाबलों में 49.34 की औसत के साथ 8,586 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 23 शतक और 32 अर्धशतक निकले।

वीरेंद्र सहवाग टेस्ट मैच के एक ही दिन में सर्वाधिक रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं। वीरू ने श्रीलंका के विरुद्ध दिसंबर 2009 में खेले गए टेस्ट मैच में एक ही दिन 284 रन बनाए थे।

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क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सहवाग को साल 2002 में 'अर्जुन अवार्ड' से सम्मानित किया गया, जिसके बाद 2010 में 'पद्म श्री' अवार्ड से नवाजा गया। इसी साल उन्हें 'आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया।

Article Source: IANS

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