फीफा वर्ल्ड कप 2026 की खिताबी रेस से बाहर होने के बाद ज्लात्को डालिच ने बुधवार को क्रोएशिया के हेड कोच पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उनका लगभग 9 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। क्रोएशियाई टीम फीफा वर्ल्ड कप के 'राउंड-ऑफ-32' में पुर्तगाल से स्टॉपेज टाइम में 1-2 से हारकर बाहर हो गई थी।
क्रोएशियन फुटबॉल फेडरेशन की तरफ से जारी बयान में 59 वर्षीय डालिच ने कहा कि काम जारी रखने की इच्छा होने के बावजूद, देश के फुटबॉल इतिहास के सबसे सफल दौर में से एक को समाप्त करने का समय आ गया है।
डालिच ने कहा, "मैं अध्यक्ष कुस्टिक का उनके बेहतरीन सहयोग और मुझ पर भरोसा बनाए रखने के लिए धन्यवाद देता हूं। हाल के दिनों में मिले समर्थन ने मुझे अपने पद छोड़ने के फैसले पर फिर से सोचने पर मजबूर किया, लेकिन... अब समय आ गया है। भले ही मुझमें क्रोएशिया के साथ नई सफलताएं हासिल करने की महत्वाकांक्षा और इच्छा हो, मुझे लगता है कि इस शानदार दौर को समाप्त करने का यही सही समय है। मैं भारी मन से जा रहा हूं और मुझे गर्व है कि मैंने क्रोएशियन फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में योगदान दिया है। मैं अपने उत्तराधिकारी, क्रोएशियन नेशनल टीम और क्रोएशियन फुटबॉल को भविष्य की जीतों के लिए शुभकामनाएं देता हूं, जिन पर मुझे पूरा भरोसा है।"
अक्टूबर 2017 में नेशनल टीम की कमान संभालने के बाद से अपनी यात्रा को याद करते हुए, डालिच ने क्रोएशिया को मैनेज करने को अपने करियर का सबसे बड़ा सम्मान बताया और माना कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी लीडरशिप में टीम इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा, "एक सेलेक्टर की भूमिका में कई मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन यह फैसला मेरे लिए निश्चित रूप से सबसे मुश्किल रहा है। मैंने हमेशा कहा है कि अपनी नेशनल टीम की कप्तानी करने से बड़ा कोई सम्मान नहीं है, और इससे ज्यादा जरूरी, जिम्मेदारी वाला या शानदार काम मेरे लिए कोई और नहीं हो सकता। जब मैंने नेशनल टीम की कमान संभाली, तो मुझे खिलाड़ियों की काबिलियत और खुद पर भरोसा था, लेकिन मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हम इन लगभग नौ वर्षों में इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर लेंगे।
उन्होंने कहा, "मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मुझे हर जीत, बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने, तीन मेडल जीतने और क्रोएशियाई फुटबॉल की उन शानदार रातों पर कितना गर्व है, जब हमने वर्ल्ड कप में इंग्लैंड या ब्राजील को हराया था। लेकिन सबसे ज्यादा गर्व मुझे टीम और क्रोएशियन लोगों के बीच बनी एकता पर है, जिसे हमने वर्ल्ड मेडल जीतने के बाद घर लौटने पर हुए उन यादगार स्वागत समारोहों में खास तौर पर देखा।"
अक्टूबर 2017 में नेशनल टीम की कमान संभालने के बाद से अपनी यात्रा को याद करते हुए, डालिच ने क्रोएशिया को मैनेज करने को अपने करियर का सबसे बड़ा सम्मान बताया और माना कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी लीडरशिप में टीम इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा, "एक सेलेक्टर की भूमिका में कई मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन यह फैसला मेरे लिए निश्चित रूप से सबसे मुश्किल रहा है। मैंने हमेशा कहा है कि अपनी नेशनल टीम की कप्तानी करने से बड़ा कोई सम्मान नहीं है, और इससे ज्यादा जरूरी, जिम्मेदारी वाला या शानदार काम मेरे लिए कोई और नहीं हो सकता। जब मैंने नेशनल टीम की कमान संभाली, तो मुझे खिलाड़ियों की काबिलियत और खुद पर भरोसा था, लेकिन मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हम इन लगभग नौ वर्षों में इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर लेंगे।
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डालिक ने खिलाड़ियों की तारीफ की करते हुए भरोसा जताया कि क्रोएशिया का भविष्य सुरक्षित है। उन्होंने कहा, "बेशक, इन सभी कामयाबियों में सबसे अहम वे हैं जो मैदान पर मिलीं। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे इतने शानदार फुटबॉलर्स और बेहतरीन लोगों के मार्गदर्शन का मौका मिला। हमारे कप्तान लुका मोड्रिक से लेकर रूस में मेरे साथ रहे सभी अनुभवी खिलाड़ियों तक, और उन युवा खिलाड़ियों तक जिन्हें हम नेशनल टीम में लाए हैं और जो लगातार अहम भूमिकाएं निभा रहे हैं। मैं उनका बहुत आभारी हूं कि उन्होंने क्रोएशिया को सबसे ऊपर रखा और हमेशा अपने व्यवहार, प्रतिबद्धता और नजरिए से यह दिखाया कि क्रोएशियाई नेशनल टीम का कल्चर क्या है। इन सभी में क्रोएशिया का भविष्य उज्ज्वल है, और जब तक नेशनल टीम उनके लिए एक पवित्र जिम्मेदारी बनी रहेगी—जैसा कि पिछली पीढ़ियों के लिए रही है—तब तक क्रोएशिया मजबूत और प्रतिस्पर्धी बना रहेगा और किसी भी टीम को टक्कर देने के काबिल रहेगा।"