Paris Summer Olympics: भारत कुल 6 मेडल (5 ब्रॉन्ज और 1 सिल्वर) के साथ पेरिस ओलंपिक मेडल टैली में 71वें स्थान पर रहा। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत 7 मेडल (1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज) के साथ मेडल टैली में 48वें स्थान पर था, लेकिन क्या ये परफॉर्मेंस ओलंपिक के मंच पर भारत को एक मजबूत दावेदार बना पाएगा। ये सवाल लगातार उठ रहा है क्योंकि देश की नजर 2036 ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने पर भी है।

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ओलंपिक के मंच पर अगर इतिहास के पन्नों में थोड़ा पीछे जाए तो गिनती के कुछ खिलाड़ी हमें याद होंगे। मगर भविष्य में भारत को खेलों के महाकुंभ में एक बड़ी ताकत बनना है तो, तैयारी भी मजबूत करनी होगी। ओलंपिक में जो खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्हें खूब इनाम और सरकारी नौकरी मिल रही। मगर, उन खिलाड़ियों को क्या जो निराश होकर लौटे हैं।

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ओलंपिक के लिए भारत की तैयारियों का 'शंखनाद' खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। पीएम मोदी ने पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इससे पहले पीएम मोदी ने इन सभी को लाल किले पर हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में आमंत्रित किया था और इसके बाद पीएम हाउस में उन्हें होस्ट किया।

उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक भारतीय खेलों के लिए एक लॉन्च पैड के रूप में काम करेगा और यह हमारा टर्निंग पॉइंट साबित होगा। पीएम मोदी ने कहा, ''ओलंपिक के मंच पर हमारे युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। भारत का यह युवा दल इस बात का प्रमाण है, खेल में भारत का भविष्य में दबदबा रहने वाला है।

ये बात पीएम मोदी भी जानते हैं कि केवल चंद नामों से ओलंपिक में 'बादशाहत' हासिल करना मुमकिन नहीं है, इसलिए जमीनी स्तर पर युवा हुनर को तराशने और उन्हें 'मेडल वीर' बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इन आंकड़ों को बदलने के लिए देश में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट इकोसिस्टम को तैयार करने पर प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को ढूंढना, तराशना और उनका पोषण करना महत्वपूर्ण है।

2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में अभी पूरे चार साल बाकी है।कोविड के कारण टोक्यो और पेरिस ओलंपिक के बीच खिलाड़ियों को तैयारी करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। मगर, अब प्रधानमंत्री की देखरेख में केंद्र और राज्य सरकार न केवल मुख्य खिलाड़ियों पर बल्कि युवा समेत हर खिलाड़ी को बराबर मौका देने का प्रयास कर रही है जिसकी मदद से भारत मेडल के लिए सिर्फ कुछ नामों पर निर्भर नहीं रहे।

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ये बात पीएम मोदी भी जानते हैं कि केवल चंद नामों से ओलंपिक में 'बादशाहत' हासिल करना मुमकिन नहीं है, इसलिए जमीनी स्तर पर युवा हुनर को तराशने और उन्हें 'मेडल वीर' बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इन आंकड़ों को बदलने के लिए देश में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट इकोसिस्टम को तैयार करने पर प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को ढूंढना, तराशना और उनका पोषण करना महत्वपूर्ण है।

Article Source: IANS

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