Chennai Super Kings: प्लास्टिक का बल्ला हाथ में लिए ढाई साल का एक बच्चा बल्लेबाजी कर रहा था। पिता एक के बाद एक गेंदें फेंक रहे थे, लेकिन उनमें से एक बॉल पर ढाई साल के इस बच्चे ने ऐसा पुल शॉट खेला, जिसे देखकर पूरा परिवार हैरान रह गया। गेंद दो घर दूर जाकर गिरी। इस एक शॉट को देखकर पिता ने ठान लिया कि बेटे को क्रिकेट की दुनिया का बेताज बादशाह बनाएंगे। 17 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू। 18 की उम्र में भारत को अपनी कप्तानी में दिलाया अंडर-19 विश्व कप का खिताब। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि आयुष म्हात्रे हैं।

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आयुष म्हात्रे के टैलेंट को पिता ने सिर्फ ढाई साल की उम्र में पहचान लिया था। जब आयुष 5 साल के हुए, तो पिता ने उनका दाखिला क्रिकेट एकेडमी में करा दिया। छोटी सी उम्र में क्रिकेट आयुष के जीवन का हिस्सा बन गया। वह जहां जाते, अपने साथ गेंद लेकर जाते। आयुष को प्रैक्टिस करने के लिए कोई खास जगह की जरूरत नहीं होती है वो कहीं भी बल्ला थामकर बल्लेबाजी करना शुरू कर देते थे। रिश्तेदारों के घर जाकर आयुष आलू, प्लाज से भी प्रैक्टिस करने लगते थे। एकेडमी में आयुष अपनी बल्लेबाजी के दम पर जल्द ही सुर्खियां बटोरने लगे। आयुष को लेकर कहा जाने लगा कि यह लड़का 100 प्रतिशत सोना है।

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पिता ने बेटे के टैलेंट को पहले ही पहचान लिया था और वह जल्द ही साउथ मुंबई की तरफ शिफ्ट हो गए, ताकि आयुष को बेहतर कोचिंग मिल सके। दिलीप वेंगसरकर की एकेडमी में आयुष के पिता योगेश ने फोन किया और अपने बेटे के दाखिले की बात की। हालांकि, एकेडमी की तरफ से जवाब आया कि जब आयुष 8 साल के हो जाएं, तो उन्हें ले आना। पिता आयुष की बल्लेबाजी देख चुके थे और उन्होंने कोच से गुजारिश करते हुए कहा कि एक बार वह उनकी बल्लेबाजी देख लें।

कोच राजी हो गए और उसके बाद आयुष ने अपने एक से बढ़कर एक शॉट से हर किसी को प्रभावित कर दिया। आलम यह था कि आयुष 6 साल की उम्र में 12 साल के लड़कों के साथ एकेडमी में क्रिकेट खेला करते थे। दिलीप वेंगसरकर ने जब उनकी बल्लेबाजी पहली बार देखी, तो वह भी कद में छोटे, लेकिन लंबे-लंबे शॉट लगा रहे इस बल्लेबाजी के मुरीद हो गए।

हालांकि, आयुष की राह आसान नहीं थी, क्योंकि एकेडमी 80 किलोमीटर दूर थी और माता-पिता दोनों ही नौकरी करते थे। ऐसे में आयुष को हर दिन क्रिकेट एकेडमी तक ले जाने की जिम्मेदारी उनके नाना ने उठाई। आयुष हर दिन सुबह 5 बजे उठते और स्कूल जाते। इसके बाद नाना के साथ लोकल ट्रेन का सफर तय करके एकेडमी पहुंचते। घर वापस आते-आते हर दिन 8 बज जाते। मगर क्रिकेट के प्रति जुनून ऐसा था कि आयुष वापस लौटकर भी 45 मिनट तक छत पर लटकी हुई गेंद से भी प्रैक्टिस करते। धीर-धीरे आयुष कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते चले गए।

कोच राजी हो गए और उसके बाद आयुष ने अपने एक से बढ़कर एक शॉट से हर किसी को प्रभावित कर दिया। आलम यह था कि आयुष 6 साल की उम्र में 12 साल के लड़कों के साथ एकेडमी में क्रिकेट खेला करते थे। दिलीप वेंगसरकर ने जब उनकी बल्लेबाजी पहली बार देखी, तो वह भी कद में छोटे, लेकिन लंबे-लंबे शॉट लगा रहे इस बल्लेबाजी के मुरीद हो गए।

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आयुष मानो ऐसे ही मंच की तलाश लंबे समय से कर रहे थे। आईपीएल 2025 में आयुष ने 7 मुकाबलों में 188 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 240 रन बनाए और हर किसी को अपनी बल्लेबाजी का मुरीद बना दिया। वहीं, अंडर-19 विश्व कप 2026 में आयुष का प्रदर्शन बतौर बल्लेबाज और कप्तान शानदार रहा। उन्होंने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को खिताब को भी दिलाया। आईपीएल 2026 में भी आयुष लगातार अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में वह टीम इंडिया की जर्सी में बल्ले से धमाल मचाते हुए अगर नजर आए, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी।

Article Source: IANS

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