इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के लंबे समय से डिप्टी चेयरमैन रहे इमरान ख्वाजा को बुधवार को संस्था के सालाना सम्मेलन के दौरान एसोसिएट मेंबर डायरेक्टर्स के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
इस चुनाव में फ्रांस के गुरुमूर्ति पलानी 35 वोटों के साथ सबसे आगे रहे, जबकि मुबाशिर उस्मानी (यूएई) और रूडी वैन वुरेन (नामीबिया) ने 26-26 वोट हासिल किए। इस तरह उन्होंने 17 सदस्यों वाले ताकतवर आईसीसी बोर्ड में दो साल के कार्यकाल के लिए उपलब्ध तीन सीटों पर कब्जा जमाया। पलानी और वैन वुरेन पहली बार आईसीसी के टॉप बोर्ड में शामिल हुए हैं, जबकि उस्मानी अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रहे।
सिंगापुर के अनुभवी प्रशासक ख्वाजा 23 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे। मुकाबले में शामिल पांचवें उम्मीदवार महिंदा वल्लीपुरम (मलेशिया) को सिर्फ 19 वोट मिले।
पेशे से वकील ख्वाजा ने इससे पहले साल 2020 में शशांक मनोहर के पद छोड़ने के बाद अंतरिम आईसीसी चेयरमैन के तौर पर काम किया था। उन्होंने एन. श्रीनिवासन, ग्रेग बार्कले और जय शाह जैसे कई प्रमुखों के अधीन डिप्टी चेयरमैन के तौर पर भी काम किया।
इमरान ख्वाजा को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के बीच अहम बातचीत को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए 'संकटमोचक' भी माना गया था, जिससे कोलंबो में पुरुषों का टी20 वर्ल्ड कप मैच आसानी से हो सका।
पेशे से वकील ख्वाजा ने इससे पहले साल 2020 में शशांक मनोहर के पद छोड़ने के बाद अंतरिम आईसीसी चेयरमैन के तौर पर काम किया था। उन्होंने एन. श्रीनिवासन, ग्रेग बार्कले और जय शाह जैसे कई प्रमुखों के अधीन डिप्टी चेयरमैन के तौर पर भी काम किया।
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ख्वाजा के पद छोड़ने के बाद अब आईसीसी को नया उपाध्यक्ष नियुक्त करना होगा। उम्मीद है कि 11 जुलाई को समाप्त होने वाले चार दिवसीय सम्मेलन से पहले नव-निर्वाचित तीन एसोसिएट डायरेक्टर में से किसी एक को इस पद के लिए चुना जाएगा।