सुमित कुमार रॉय रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) सीजन 2 की नीलामी में सबसे महंगे भारतीय रहे, जिन पर 'हैदराबाद हीरोज' ने 3.75 लाख रुपए का दांव खेला है। भारतीय रग्बी स्टार का मानना ​​है कि नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी का दर्जा मिलना कोई बोझ नहीं, बल्कि इस खेल के प्रति बरसों के समर्पण का नतीजा है।

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दुनिया की पहली फ्रेंचाइजी-आधारित रग्बी सेवंस प्रतियोगिता, रग्बी प्रीमियर लीग का दूसरा सीजन 16 जून से शुरू होने जा रहा है। पिछले साल इस लीग को छह शहरों की टीमों के साथ शुरू किया गया था, लेकिन इस बार चार टीमों वाला महिला संस्करण भी शामिल किया गया है।

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हैदराबाद हीरोज ने पहले सीजन में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। लीग चरण में कोई भी मैच न गंवाने के बाद इस टीम ने नॉकआउट चरण में एकमात्र हार का सामना किया। सीजन 2 से पहले, हैदराबाद ने स्पेनिश स्टार मैनुअल मोरेनो और केन्याई खिलाड़ी केविन वेकेसा को रिटेन किया और पिछले साल की मुख्य टीम के कई सदस्यों को सफलतापूर्वक वापस बुलाया, जिनमें भारत के बेहतरीन खिलाड़ी सुमित भी शामिल हैं।

लीग के सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी बनने पर सुमित कुमार रॉय ने 'आईएएनएस' के साथ खास बातचीत में कहा, "मैं इसे अपनी बरसों की कड़ी मेहनत के तौर पर देखता हूं। मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि मैंने कड़ी मेहनत की है, इसलिए मुझे इसका कोई दबाव महसूस नहीं होता। मुझे खुद से प्रेरणा मिलती है, क्योंकि कड़ी मेहनत ही मेरे लिए प्रेरणा है।"

एशिया रग्बी सेवन्स चैंपियनशिप में भारत की अंडर-20 टीम की कप्तानी करने और सीनियर नेशनल टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद, सुमित धीरे-धीरे भारतीय रग्बी के प्रमुख चेहरों में से एक बन गए हैं। एक लीडर के तौर पर अपने विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने अंडर-20 टीम में कप्तान से टीम का नेतृत्व करना सीखा है, क्योंकि टीम का मतलब टीम स्पिरिट और टीम गेम होता है। टीम का नेतृत्व कैसे करना है, अगर किसी को कोई समस्या हो तो उसे कैसे हल करना है, ऐसा कुछ नहीं है जिसका कोई समाधान न हो, हर समस्या का समाधान होता है।"

सुमित ने बताया कि बातचीत और आपसी तालमेल ने ड्रेसिंग रूम में सांस्कृतिक अंतर को कम करने में मदद की है। उन्होंने कहा, "हमारी टीम में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी हैं। कुछ स्पेन से हैं, कुछ केन्या से हैं। वे बहुत अलग-अलग देशों से आए हैं, इसलिए उनसे जुड़ने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि हम इतने दिनों बाद पहली बार उनके साथ खेल रहे हैं, बल्कि ऐसा लगता है कि हम कई वर्षों से उनके साथ खेल रहे हैं। वे हमें बहुत जल्दी समझ लेते हैं, इसलिए उनसे बातचीत करना आसान हो जाता है। अब मैं उनके साथ हर जगह हंसी-मजाक करने का आदी हो गया हूं।"

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सुमित सीएएसए सेवंस में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेशनल टीम की तरक्की का अब तक का सबसे बड़ा संकेत है। भारत की तरक्की से खुश होने के बावजूद, उनका मानना ​​है कि टॉप-लेवल की टीमों के खिलाफ और ज्यादा खेलने का मौका मिलना जरूरी है।

सुमित ने बताया कि बातचीत और आपसी तालमेल ने ड्रेसिंग रूम में सांस्कृतिक अंतर को कम करने में मदद की है। उन्होंने कहा, "हमारी टीम में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी हैं। कुछ स्पेन से हैं, कुछ केन्या से हैं। वे बहुत अलग-अलग देशों से आए हैं, इसलिए उनसे जुड़ने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि हम इतने दिनों बाद पहली बार उनके साथ खेल रहे हैं, बल्कि ऐसा लगता है कि हम कई वर्षों से उनके साथ खेल रहे हैं। वे हमें बहुत जल्दी समझ लेते हैं, इसलिए उनसे बातचीत करना आसान हो जाता है। अब मैं उनके साथ हर जगह हंसी-मजाक करने का आदी हो गया हूं।"

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24 वर्षीय सुमित ने रग्बी प्रीमियर लीग के महत्व को लेकर कहा, "सबसे पहली बात, यह प्लेटफॉर्म छोटा या बड़ा नहीं है, यहां सब बराबर हैं। इसलिए हमें विदेशों से आए दिग्गजों से सीखना है कि क्या और कैसे करना है। हमें उनसे अनुभव लेना है। इससे हमारी भारतीय टीम में कुछ बदलाव आएंगे। जब हम खेलने जाएंगे और इन चीजों को लागू करेंगे, तो यह हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगा।"

Article Source: IANS
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