Mansoor ali khan pataudi: Cricket News & Match Updates
जब इलाहाबाद में खेले इमरान खान: 1984 का वो क्रिकेट मैच जो इतिहास बन गया
कुछ क्रिकेट ग्राउंड टेस्ट मैच, इंटरनेशनल टूर्नामेंट या किसी रोमांचक प्रदर्शन की वजह से मशहूर हो जाते हैं। कुछ ग्राउंड ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ एक दोपहर की बदौलत क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं।
इलाहाबाद (जिसे अब प्रयागराज कहते हैं) के लिए ऐसी एक दोपहर थी 26 फरवरी 1984 की। ये वही दिन था जब पाकिस्तान के स्टार कप्तान इमरान खान, भारत के उस क्रिकेटर के लिए जो कभी इंटरनेशनल क्रिकेट भी नहीं खेला, उनके बेनिफिट मैच में खेलने खास तौर पर इलाहाबाद के मदन मोहन मालवीय स्टेडियम पहुंच गए थे।
ये कोई भारत-पाकिस्तान इंटरनेशनल मैच नहीं था। इसमें न ही कोई चैंपियनशिप पॉइंट दांव पर लगे थे और न ही इसमें दिखाए प्रदर्शन से कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड बनने वाला था। तब भी वे आए और वह मैच, इलाहाबाद के क्रिकेट प्रेमियों के लिए, इस शहर में देखे सबसे यादगार स्पोर्ट्स इवेंट्स में से एक बन गया।
यह विलियम घोष (William Ghosh) के लिए आयोजित बेनिफिट मैच था। घोष कई साल रेलवे के लिए क्रिकेट खेले पर फर्स्ट क्लास क्रिकेट से आगे न बढ़ पाए। रिकॉर्ड 71 फर्स्ट-क्लास मैच में 239 विकेट था। बाद में जब बीमारी ने घेरा तो पैसे की तंगी ने परेशानी में डाल दिया। ऐसे में ही उनकी मदद के लिए बेनिफिट मैच खेला गया और इस मैच के लिए इमरान के आने से यह लोकल फंड रेजिंग मैच, घरेलू क्रिकेट और इंटरनेशनल स्टारडम का ऐसा अनोखा 'संगम' बन गया, जिसे पुराने लोग इलाहाबाद में आज तक याद करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऐसी क्या बात थी कि पाकिस्तान के ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टार्स में से एक इमरान, कुछ घंटों के लिए इलाहाबाद आ गए थे? वे कुछ ही दिन पहले दिल्ली में आयोजित बिशन सिंह बेदी के बेनिफिट मैच के लिए दिल्ली नहीं आए थे पर अब दिल्ली से भी आगे, इलाहाबाद पहुंच गए।
इस सवाल का जवाब एक पुरानी पारिवारिक दोस्ती में छिपा था। घोष, इमरान के पिता इकरमुल्लाह खान नियाज़ी के करीबी दोस्त थे। दोनों की दोस्ती देश के बंटवारे से पहले की थी। दोनों दोस्त सीमा रेखा की बदौलत अलग-अलग देश के तो हो गए पर दोस्ती बनी रही। इसलिए घोष की बीमारी और आर्थिक तंगी की खबर मिली तो वही दोस्ती, बेनिफिट मैच को कामयाब बनाने के लिए इमरान को इलाहाबाद लाने की वजह बनी।
तब इमरान अपनी क्रिकेट की शोहरत की बुलंदी पर थे। तब भी, वह अपने अब्बा के कहने पर इलाहाबाद में एक बेनिफिट मैच के लिए आने को राजी हो गए। वह पाकिस्तान से दिल्ली आए फ्लाइट से और फिर ट्रेन से इलाहाबाद पहुंचे। जो तब उनके सफर का इंतजाम कर रहे थे, उनके मुताबिक ट्रेन के सफर दौरान उन्होंने रेलवे कैटरिंग सर्विस से कुछ नहीं खाया, अपनी सख्त फिटनेस रूटीन बनाए रखी और जब जरूरत हुई तो सिर्फ संतरे खाए।
उस मैच में इमरान 'जीप इलेवन' (Geep XI) के कप्तान थे और जब मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में बैटिंग के लिए उतरे तो भारी भीड़ के शोर से स्टेडियम गूंज उठा। स्टेडियम तो खचाखच भरा ही हुआ था, हजारों लोग सिर्फ इस इवेंट का हिस्सा बनने के लिए स्टेडियम के बाहर भी जमा हो गए थे। अपने शहर के रणजी हीरोज को खेलते देखने के आदी शहर इलाहाबाद के लिए, यह एक पाकिस्तानी सुपर स्टार को इतने करीब से देखने का एक अनोखा मौका था।
इमरान ने भी उन्हें निराश नहीं किया। खूब आक्रामक स्ट्रोक लगाए जो उस दिन की सबसे बड़ी याद बन गए। स्टेडियम के बाहर वाले भी खुश क्योंकि उनके कुछ छक्कों से गेंद स्टेडियम के बाहर गिरी। 'जीप इलेवन' के उप कप्तान एक लोकल खिलाड़ी सैयद हैदर अली थे। सालों बाद एक इंटरव्यू में उस दोपहर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इमरान के छक्कों के सामने स्टेडियम छोटा पड़ गया था और गेंद खूब ग्राउंड के बाहर जा रही थी।
उस प्रदर्शनी मैच का स्कोर कार्ड, मैच से बनी यादों के मुकाबले कोई मायने नहीं रखता। उस दोपहर इलाहाबाद में मैच देख रहे लोगों के लिए, इमरान सिर्फ एक विदेशी और पाकिस्तानी क्रिकेटर नहीं थे; एक वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी थे जो अचानक उनके अपने ग्राउंड पर खेल रहे थे और भारत के एक खिलाड़ी की मदद कर रहे थे।
इस मैच की एक और खास बात थी। भारत के पूर्व कप्तान नवाब पटौदी भी इस मैच में हिस्सा लेने आए थे। मंसूर अली खान पटौदी ने तब मशहूर इंटरनेशनल अंपायर स्वरूप किशन के साथ लगभग एक घंटे तक अंपायरिंग की। उसके बाद मशहूर अंपायर टीडी मुखर्जी उनकी जगह आ गए।
इलाहाबाद के लिए ये सिर्फ एक मैच नहीं था। पूरा शहर, इमरान के आने से इस स्टोरी में हिस्सेदार बन गया था। लोकल खिलाड़ियों के लिए ये एक यादगार दिन था। वे इमरान को सिर्फ खेलते नहीं देख रहे थे, उनके साथ ड्रेसिंग रूम और ग्राउंड पर मौजूद रहे। 25 साल तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेले हैदर अली, 1984 के इस मैच को अपने करियर के सबसे यादगार पल में से एक मानते थे।
इस बेनिफिट मैच से एक क्रिकेटर के लिए, जिंदगी के एक मुश्किल दौर में पैसे जुटाने में बड़ी मदद मिली। इमरान के आने से स्पांसर आ गए। गेट मनी भी इकट्ठा हो गई। इमरान ने आने-जाने का खर्चा तक न लिया। दूसरी तरफ इस मैच ने हजारों क्रिकेट फैन्स को वह अनुभव दिया जो इंटरनेशनल स्टेडियम से ही जुड़ा होता है और वह है दुनिया के सबसे मशहूर क्रिकेटरों में से एक को अपने ही शहर इलाहाबाद में खेलते देखना। इसने भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से ऊपर उठकर क्रिकेट की एक अनोखी मिसाल कायम की।
यह मैच किसी भारत-पाकिस्तान सीरीज के इतिहास का हिस्सा तो नहीं बना, लेकिन इलाहाबाद की क्रिकेट यादों का हिस्सा जरूर बन गया। Read More...
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