पाकिस्तान के अनुभवी और प्रसिद्ध क्रिकेट जर्नलिस्ट कमर अहमद का 88 साल की उम्र में कराची में दिल की बीमारी से निधन हो गया। पाकिस्तान के सबसे चर्चित क्रिकेट जर्नलिस्ट के तौर पर लगभग पांच दशक के करियर में, कई आईसीसी इवेंट की रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने 400 से ज्यादा टेस्ट, 700 से ज्यादा वनडे और 9 वर्ल्ड कप कवर किए। कई पूर्व क्रिकेटर, कमेंटेटर और स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट (जिनमें भारत से भी हैं) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्यार से 'क्यू' के नाम से लोकप्रिय, कमर अहमद ने पाकिस्तानी अखबार डॉन और पाकिस्तान की पत्रिका द क्रिकेटर के लिए नियमित लिखने के साथ-साथ, वे बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और कई ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई अख़बारों समेत विदेशी मीडिया से भी जुड़े थे।
1937 में जन्म, देश के विभाजन के समय वे कराची चले गए और वहीं बस गए। क्रिकेट में मौका मिला हैदराबाद, सिंध में तो वहां रहने लगे और 17 फर्स्ट क्लास मैच खेले। इंग्लैंड में पढ़ाई की और तभी ब्रिटिश मीडिया से जुड़ने का मौका मिला और शुरुआत बीबीसी उर्दू सर्विस से हुई।
कई किताबें लिखीं, जिनमें पाकिस्तान बुक ऑफ़ क्रिकेट (1976 से 1998-99 तक चला एनुअल), टेस्टिंग टाइम्स, शोडाउन और गोल्डन ग्रेट्स ऑफ़ पाकिस्तान क्रिकेट बड़ी मशहूर हुईं। चूंकि टॉप स्तर पर खेले इसलिए क्रिकेट को अच्छी तरह से जानते थे जिसकी बदौलत खेल के अलग-अलग पहलू पर कमेंट कर सकते थे।
वह खुद धीमे खब्बू ऑर्थोडॉक्स स्पिनर थे और उनके नाम सबसे आश्चर्यजनक उपलब्धि ये थी कि अकेले ऐसे खिलाड़ी थे जिसने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सभी पांच मोहम्मद भाइयों (वज़ीर, हनीफ, रईस, मुश्ताक और सादिक) को आउट किया। मशहूर ब्रिटिश क्रिकेट हिस्टोरियन, पीटर ओबोर्न ने पाकिस्तान क्रिकेट हिस्ट्री पर अपनी मशहूर किताब, 'वुंडेड टाइगर' में इस बारे में ज़िक्र किया है। पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़ी दिलचस्प स्टोरी में से एक ये भी है कि अपने कप्तान हनीफ के, सादिक को आउट न करने के आर्डर के बावजूद, सादिक को आउट किया था।
उन्होंने और मुश्ताक मोहम्मद ने एक ही मैच से अपना फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया (वहां एक-दूसरे को आउट किया) और उसके साथ ही पक्के दोस्त बन गए। वह खुद पाकिस्तान टीम में एक जगह के दावेदार थे, ख़ास तौर पर 1957-58 के कैरिबियन टूर के लिए, लेकिन चूंकि लाहौर या कराची जैसे बड़े क्रिकेट सेंटर से नहीं थे, इसलिए सेलेक्टर के रडार पर आ ही नहीं पाए।
जो आखिरी किताब लिखी वह 2020 में छपी 'फार मोर दैन ए गेम: एन ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए क्रिकेट राइटर एंड ब्रॉडकास्टर' उनकी क्रिकेट यादों का संकलन थी जिसमें उन्होंने उन अलग-अलग मुद्दों/घटनाओं की चर्चा की जिन्हें खुद करीब से देखा या कवर किया जैसे कि केरी पैकर का डब्ल्यूएससी, अंपायरिंग विवाद, 1976-77 का वह मशहूर पेमेंट विवाद जिसकी बदौलत पाकिस्तान क्रिकेट में कुछ प्रोफेशनल नजरिया आया, इमरान खान की टीम की पाकिस्तान की 1992 वर्ल्ड कप जीत, 1992-93 में वेस्टइंडीज सीरीज के दौरान वसीम अकरम, वकार यूनिस, मुश्ताक अहमद और आकिब जावेद का इनके पास मारिजुआना मिलने पर गिरफ्तार होना।
उनकी अपनी गिनती और पब्लिकेशन रिकॉर्ड के अनुसार, कमर अहमद ने 400 से ज़्यादा टेस्ट मैच कवर किए। जनवरी 2014 में शारजाह में पाकिस्तान-श्रीलंका तीसरा टेस्ट, एक जर्नलिस्ट के तौर पर उनका 400वां टेस्ट था। टेस्ट में खेल शुरू होने से पहले, पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मोइन खान ने ग्राउंड पर कमर अहमद को एक ट्रॉफी दे, सम्मानित किया।टेस्ट मैच के दौरान किसी जर्नलिस्ट को ग्राउंड पर सम्मानित करना एक अनोखी घटना से कम नहीं था।
तब वे ऐसे सिर्फ़ तीसरे जर्नलिस्ट थे (उनसे पहले: इंग्लैंड के जॉन वुडकॉक और ऑस्ट्रेलिया के रिची बेनो) जिसने 400 टेस्ट कवर किए। इसका मतलब है कि तब तक खेले गए कुल टेस्ट मैच में से लगभग पांचवें हिस्से में वे मौजूद थे। उन्होंने सुनील गावस्कर का 10,000वां रन, रिचर्ड हैडली का 400वां विकेट, अनिल कुंबले के 10 विकेट, क्रिकेट का 1,000वां और 2,000वां टेस्ट भी देखा था।
उनका नाम दो और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा है: नेल्सन मंडेला के जेल से रिहा होने के फ़ौरन बाद उनका इंटरव्यू लिया और वह 1987 में फैसलाबाद स्टेडियम में थे जब माइक गैटिंग और शकूर राणा के बीच मशहूर बहस हुई थी।
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उन पर लिखे एक आर्टिकल पर लेखक को धन्यवाद देते हुए उन्होंने जो लिखा, उसके आधार पर : उन्होंने 453 टेस्ट कवर किए, 1955 से 500 से ज़्यादा टेस्ट देखे होंगे, 9 पुरुष वर्ल्ड कप, 743 ओडीआई, लॉर्ड्स में एक इंग्लैंड-भारत टी20 और 4 महिला वर्ल्ड कप फाइनल देखे/कवर किए।